जयंती विषेश: कैसे बने बोस युवाओं की पहली पसन्द

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जयंती विषेश: कैसे बने बोस युवाओं की पहली पसन्द

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डेस्क। सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था। और उनेक पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती दत्त था। बता दें वह भारत में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ थे। और उनकी देशभक्ति, अचल साहस और वीरता ने उन्हें एक राष्ट्रीय नायक भी बनाया। द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजी पार्टी और इंपीरियल जापान की मदद से उन्होंने अंग्रेजों से आजादी के लिए अथक प्रयास भी किए। 
वहीं उनका नाम सुनकर हर भारतीय को गर्व भी महसूस होता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें अक्सर गांधीजी के साथ विचारधाराओं के टकराव का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसके वह असल में हकदार थे।
सुभाष चंद्र बोस की शिक्षा
सुभाष चंद्र बोस जानकीनाथ बोस और प्रभावती दत्त की चौदह संतानों में से नौवें बच्चे थे।
उन्होंने कटक में अपने अन्य भाई-बहनों के साथ प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल में पढ़ाई की, जिसे अब स्टीवर्ट हाई स्कूल भी कहा जाता है। वह एक मेधावी छात्र थे और उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में दूसरा स्थान भी हासिल किया था। उन्होंने कलकत्ता में प्रेसीडेंसी कॉलेज (अब विश्वविद्यालय) में एडमिशन लिया था। साथ ही जब वह 15 वर्ष के थे, तब स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं और दर्शन से बहुत ज्यादा प्रभावित भी हुए।
आपको बाद में उन्हें ओटेन नाम के एक प्रोफेसर पर हमला करने के आरोप में कॉलेज से निष्कासित भी कर दिया गया था। हालांकि उन्होंने अपील की थी कि वह इस हमले में भागीदार बिल्कुल नहीं थे, केवल वहां खड़े थे। इस घटना ने उनमें विद्रोह की भावना को प्रज्वलित भी कर दिया और अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर हो रहे दुर्व्यवहार से वह काफी परेशान भी थे। साथ ही उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के तहत स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश लिया जहां पर उन्होंने वर्ष 1918 में दर्शनशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी करी।
इसके बाद वे अपने भाई सतीश के साथ भारतीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए लंदन भी चले गए। वहां उन्होंने परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में अच्छे अंकों के साथ पास हो गए लेकिन उनके मन में अभी भी मिश्रित भावनाएं थीं क्योंकि उन्हें अब अंग्रेजों द्वारा स्थापित सरकार के तहत काम भी करना होगा। जिसे वह पहले से ही तिरस्कृत करना शुरू कर चुके थे। वही इसलिए 1921 में उन्होंने कुख्यात जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना के बाद अंग्रेजों के बहिष्कार के प्रतीक के रूप में भारतीय सिविल सेवा से इस्तीफा भी दे दिया था।
सुभाष चंद्र बोस का परिवार
उनके पिता जानकी नाथ बोस, उनकी माता प्रभावती देवी थीं और उनकी 6 बहनें और 7 भाई भी थे। उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न परिवार था जो कायस्थ जाति से था।
सुभाष चंद्र बोस की पत्नी
सुभाष चंद्र बोस ने एमिली शेंकेल नामक महिला से विवाह किया था। क्रांतिकारी नेताजी की पत्नी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है हालांकि, उनकी एक बेटी है जिसका नाम अनीता बोस भी  है। वह हमेशा अपने निजी जीवन को बेहद निजी रखना पसंद करते थे और कभी सार्वजनिक मंच पर ज्यादा बात नहीं करते थे। 
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी से काफी प्रभावित थे और वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) में शामिल भी हो गए। उन्होंने "स्वराज" नामक समाचार पत्र शुरू किया, जिसका अर्थ है स्व-शासन जो राजनीति में उनके प्रवेश का प्रतीक है। चितरंजन दास उनके गुरु थे। वर्ष 1923 में वह अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने और स्वयं सीआर दास द्वारा शुरू किए गए समाचार पत्र "फॉरवर्ड" के संपादक भी बने।

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