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मीडिया न्यायधीशों को निशाना बना रही, हर चीज की हद होती है और चीजे हद में अच्छी लगती है

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Media and supreme court

देश: उच्चतम न्यायालय ने आज ईसाइयों और पादरियों पर देश मे बढ़ते हमलों के संदर्भ में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने मीडिया की खबरों पर गुस्सा जाहिर करते हुए दावा किया है कि मीडिया हर चीज को बढ़ा चढ़ा कर बताती है। न्यायधीशों को अपना निशाना बनाती है। लेकिन हर चीज की एक हद होती है और चीजे हद में अच्छी लगती है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा मीडिया न्यायधीशों को अपना निशाना बनाती है। लेकिन निशाना बनाने की एक सीमा होती है। हम पर दवाब बनाना बन्द करिये। उन्होंने कहा पिछले दिन इस याचिका पर सुनवाई नही हो पाई मैं कोरोना संक्रमित था। मीडिया ने छापा की कोर्ट की कार्यवाही में देरी। मीडिया को खबरो को सुचारू तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए।
ऑनलाइन खबरों में बताया जा रहा है कि न्यायाधीश सुनवाई में देरी कर रहे हैं। बिना तथ्यों और प्रमाणों के इस तरह के दावों का कोई औचित्य नही है। न्यायाधीशो पर दवाब बनाना आप लोग बन्द करिये। एक न्यायधीश बीमार होता है उसे कोविड होता है लेकिन आप उसे अपने तरीके से प्रस्तुत कर देते हैं। खैर अब हम इस मामले की सुनवाई को सूचीबद्ध करते हैं नही तो पुनः कोई अनोखी खबर आ जायेगी।
बता दे जज ने यह टिप्पणी तब की जब याचिका कर्ता के वकील ने इस मामले में सुनवाई किये जाने का अनुरोध किया। जानकारी के लिये बता दें वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्वेज ने जून में अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया था और कहा था कि देशभर में ईसाई संस्थानों और पादरियों के खिलाफ हर महीने औसतन 45 से 50 हिंसक हमले होते हैं।
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