हिजाब को लेकर एकबार फिर विवाद का मुद्दा बना तिलक और पगड़ी

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हिजाब को लेकर एकबार फिर विवाद का मुद्दा बना तिलक और पगड़ी

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Tilak and turban once again become a point of controversy regarding hijab

डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की है जिसके बाद से ही इसपर चर्चा हो रही है। यह वहीं मामला हैं,  जिसमें राज्य के कुछ स्कूलों और कॉलेजों में मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को बरकरार रखा गया था। अब इस मामले की सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच के द्वारा की जा रही है।

वहीं मामले की सुनवाई से पहले, एडवोकेट एजाज मकबूल ने सुझाव दिया कि सभी दलीलों को एक मामले में संकलित किया जा सकता है। 

साथ ही पीठ ने भी इस पर सहमति जताई और कहा कि उक्त संकलन एक या दो दिन में पूरा किया जा सकता है। 

लॉ वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट की माने तो वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने तर्क दिया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 145 (3) के अनुसार, एक संवैधानिक मुद्दे को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं और यह सवाल भी उठा कि क्या इन महिलाओं को ड्रेस कोड या सरकार के सामने झुकना चाहिए और क्या हेडस्कार्फ़ पहनना एक आवश्यक धार्मिक प्रथा होती है।

इस सवाल पर न्यायमूर्ति गुप्ता ने टिप्पणी की कि स्कार्फ पहनना एक आवश्यक प्रथा हो सकती है या नहीं पर सवाल यह भी हो सकता है कि क्या सरकार ड्रेस कोड को विनियमित करने का अधिकार रखती है। 

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने यह तर्क भी दिया कि सर्वोच्च न्यायालय में भी न्यायाधीश तिलक, पगड़ी आदि पहने हुए थे तो वहीं न्यायमूर्ति गुप्ता ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया कि ‘पगड़ी’ एक गैर-धार्मिक वस्तु है और शाही राज्यों में लोगों द्वारा पहनी जाती थी।

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