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अटल जी का संसद में दिया 'कालजयी भाषण', जब संसद में अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार सिर्फ एक वोट से गिर गई थी

वाजपेयी ने कहा था कि, 'हमारी इन कोशिशों के पीछे 40 वर्षों की साधना है. ये कोई आकस्मिक जनादेश नहीं है. ये कोई चमत्कार नहीं हुआ है. हमने मेहनत की है. हम जनता के बीच गए हैं. हमने संघर्ष किया है. हमारी पार्टी 365 दिन चलने वाली पार्टी है. ये कोई चुनाव में कुकुरमुत्ते की तरह निकलने वाली पार्टी नहीं है. आज हमें अकारण कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, क्योंकि हम थोड़ी अधिक सीटें नहीं ला सके. हम मानते हैं हमारी कमजोरी है. हमें बहुमत मिलना चाहिए .
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अटल जी का संसद में दिया 'कालजयी भाषण', जब संसद में अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार सिर्फ एक वोट से गिर गई थी

अटल बिहारी वाजपेयी जितने बड़े राजनेता थे, उतने ही बेहतरीन वक्ता भी. अपनी बातों को सलीके और प्रभावकारी तरीके से कहने की उनकी काबिलियत का हर कोई मुरीद था. ऐसे ही उन्हें सियासत का अजातशत्रु नहीं कहा जाता था. उन्होंने संसद हो या सड़क, हमेशा भाषाई गरिमा का ख्याल रखा. वाजपेयी की भाषण शैली ऐसी थी कि उनकी बातें बिल्कुल सटीक निशाने पर लगती थीं, किन्तु उनकी बातों से कभी किसी का दिल नहीं दुखा होगा. ऐसा ही एक भाषण अटल जी ने अपनी 13 दिन की सरकार गिरने के बाद दिया था. अटल जी के नेतृत्व वाली सरकार सिर्फ एक वोट से संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाई थी. 

अटल जी फ्लोर टेस्ट के दौरान 269 वोट जुटा सके थे, जबकि उनके खिलाफ 270 वोट पड़े थे. ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. तब इस्तीफे से पहले अटल जी ने लोकसभा में यादगार भाषण दिया था. उन्होंने भाजपा को काऊ बेल्ट की पार्टी बताने वाले सियासी दलों के आरोपों पर करारा जवाब देते हुए कहा था कि, 'हम हरियाणा में जीते, कर्नाटक में समर्थन हासिल किया. यह ठीक है कि हम केरल और तमिलनाडु में उतने ताकतवर नहीं हैं, किन्तु हमारा संगठन है.

पश्चिम बंगाल में भी हम फीसद से थोड़ा कम वोट मिला है. यदि आप वोट की बात करते हैं तो 10 फीसद वोट की बात करिए.' अटल जी ने आगे कहा कि, 'इस सदन में एक-एक व्यक्ति की पार्टी है और वो हमारे खिलाफ जमघट करके हमें हटाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें यह कोशिश करने का पूरा अधिकार है. लेकिन हैं वो एक. एक शख्स की पार्टी. एकला चलो रे. चलो एकला अपने चुनाव क्षेत्र से और दिल्ली में आकर हो जाओ इकट्ठे रे. किसलिए इकट्ठे हो जाओ देश के भले के लिए ? तो  स्वागत है. हम भी अपने तरीके से देश की सेवा कर रहे हैं.' 

वाजपेयी ने कहा था कि, 'हमारी इन कोशिशों के पीछे 40 वर्षों की साधना है. ये कोई आकस्मिक जनादेश नहीं है. ये कोई चमत्कार नहीं हुआ है. हमने मेहनत की है. हम जनता के बीच गए हैं. हमने संघर्ष किया है. हमारी पार्टी 365 दिन चलने वाली पार्टी है. ये कोई चुनाव में कुकुरमुत्ते की तरह निकलने वाली पार्टी नहीं है. आज हमें अकारण कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, क्योंकि हम थोड़ी अधिक सीटें नहीं ला सके. हम मानते हैं हमारी कमजोरी है. हमें बहुमत मिलना चाहिए .

राष्ट्रपति ने हमें मौका दिया. हमने उसका लाभ उठाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली वो अलग बात है. लेकिन, हम फिर भी सदन में सबसे बड़े विरोधी दल के रूप में बैठेंगे और आपको हमारा सहयोग लेकर सदन चलाना पड़ेगा. इस बात को मत भूलिए. लेकिन सदन चलाने में और ठीक तरह से चलाने में हम आपको पूरा सहयोग देंगे इसका भी हम आपको आश्वासन देते हैं. लेकिन सरकार आप कैसी बनाएंगे. वो किस कार्यक्रम पर बनेगी. वो सरकार कैसी चलेगी, ये मैं नहीं जानता.'

अटल जी ने कहा कि, 'हमारा जनाधार नहीं है, हमें लोगों का व्यापक समर्थन प्राप्त नहीं है. यदि हमें छोड़कर सत्ता बनाना चाहते हैं और आप समझते हैं कि वो सरकार टिकाऊ होगी. मुझे तो उसके टिकने के लक्षण नज़र नहीं आते. पहले तो उसका जन्म लेना कठिन है. जन्म लेने के बाद जीवित रहना कठिन है. ये सरकार अंतर्विरोधों में घिरी हुई देश का कितना हित कर सकेगी. ये प्रश्नवाचक चिह्न है. हर बात के लिए आपको कांग्रेस के पास दौड़ना पड़ेगा और आप उन पर निर्भर हो जाएंगे.' 

वाजपेयी ने कहा था कि, 'अभी तो मैं नहीं जानता. पहले चर्चा हुई थी कि कुछ शर्तें लगाई जा रही हैं. फिर कहा गया कि कॉर्डिनेटिंग कमेटी बनानी पड़ेगी. फ्लोर पर भी हम कॉर्डिनेशन करते हैं उसके बगैर तो सदन नहीं चलता. आप सारा देश चलाने चाह रहे हैं. बहुत अच्छी बात है. हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं. हम अपने देश की सेवा के कार्य में जुटे रहेंगे. हम संख्याबल के सामने सर झुकाते हैं. और आपको यकीन दिलाते हैं कि जो कार्य हमने अपने हाथ में लिया है वो जब तक राष्ट्र उद्देश्य पूरा नहीं कर लेंगे, तब तक विश्राम से नहीं बैठेंगे, तब तक आराम से नहीं बैठेंगे. अध्यक्ष महोदय मैं अपना इस्तीफा राष्ट्रपति महोदय को देने जा रहा हूं. 

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