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एक लाख से ज्यादा फर्जी कोरोना टेस्ट, पति-पत्नी ने सरकार को लगाया करोड़ों रुपये का चूना, ऐसे खुला राज

कुंभ मेले में फर्जी तरीके से कोविड जांच के जरिए करोड़ों रुपये का घोटाला करने के मामले में मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज लिमिटेड के मालिक और उनकी पत्नी को नोएडा में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर एक लाख से ज्यादा फर्जी कोविड-19 जांच करने का आरोप है। इस मामले की जांच उत्तराखंड की विशेष जांच टीम (एसआईटी) तथा प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। पुलिस आयुक्त आलोक सिंह के मीडिया प्रभारी ने बताया कि रविवार रात हरिद्वार पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-48 में रहने वाले मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज लिमिटेड के डायरेक्टर शरद पंत (45) तथा उनकी पत्नी मलिका पंत (43) को गिरफ्तार कर लिया।
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एक लाख से ज्यादा फर्जी कोरोना टेस्ट, पति-पत्नी ने सरकार को लगाया करोड़ों रुपये का चूना, ऐसे खुला राज
 

 

नोएडा: हरिद्वार में बीते दिनों आयोजित हुए कुंभ मेले में फर्जी तरीके से कोविड जांच के जरिए करोड़ों रुपये का घोटाला करने के मामले में मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज लिमिटेड के मालिक और उनकी पत्नी को नोएडा में उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर एक लाख से ज्यादा फर्जी कोविड-19 जांच करने का आरोप है। इस मामले की जांच उत्तराखंड की विशेष जांच टीम (एसआईटी) तथा प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है। पुलिस आयुक्त आलोक सिंह के मीडिया प्रभारी ने बताया कि रविवार रात हरिद्वार पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-48 में रहने वाले मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज लिमिटेड के डायरेक्टर शरद पंत (45) तथा उनकी पत्नी मलिका पंत (43) को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ हरिद्वार जिले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के अलावा आपदा प्रबंधन कानून व महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है।

उन्होंने बताया कि आरोप के अनुसार, इन लोगों ने एक लाख से ज्यादा फर्जी आरटी-पीसीआर जांच की तथा उत्तराखंड सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद हरिद्वार रवाना हो गई। पुलिस के अनुसार, पंजाब के फरीदकोट के रहने वाले एक व्यक्ति विपिन को 22 अप्रैल को एक एसएमएस आया जिसमें बताया गया था कि उनकी कोविड जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। विपिन ने दावा किया कि उन्होंने कभी कोविड जांच करवाई ही नहीं थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय अधिकारियों की इसकी शिकायत की। उन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को भी ई-मेल के जरिये अपनी शिकायत भेजी। आईसीएमआर ने अपनी जांच में पाया गया कि विपिन का कोविड नमूना हरिद्वार में लिया गया था। उसके बाद उत्तराखंड स्वास्थ विभाग को मामले की जांच सौंप दी गई। जांच में पता चला कि यहां एक लाख से ज्यादा फर्जी कोविड टेस्ट किए गए हैं। 

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