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आरबीआई का बड़ा फैसला रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं 

इस तिमाही भी रेपो रेट 4 फीसदी पर ही स्थिर रहेंगे और रिवर्स रेपो रेट की दर 3.55 फीसदी पर बरकरार रहेगी।
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RBI ने नही बदला रेपो रेट
आम आदमी को बदलाव न होने से मिलेगी राहत 

RBI Monetary Policy Today: कोरोना वायरस संकट के बीच आज (शुक्रवार) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आईबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक मौदिक नीति की घोषणा की | भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के तीसरे दिन आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant das) ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर (Repo Rate)को 4% पर अपरिवर्तित रखी है, वहीं रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) भी 3.35% पर अपरिवर्तित है। यानी मौजूद ब्याज दर पर लोन मिलता रहेगा।  ये आठवां मौका है जब आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव ना करके इसे स्थिर रखा है।  

इस बार की आरबीआई एमपीसी की बैठक 6 अक्टूबर को शुरू हुई थी। मालूम हो कि पिछली बार मई, 2020 में रेपो रेट में बदलाव किया गया था। तब आरबीआई ने ब्याज दरों में 0.40 फीसदी (40 बीपीएस) की कटौती की थी जिसके बाद रेपो रेट घटकर 4 फीसदी हो गया था। शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि जब तक मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर बनी रहती है, तब तक मौद्रिक नीति का रुख विकास को पुनर्जीवित करने और बनाए रखने की ओर होता है। इसके साथ ही वर्तमान में यह कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए भी आवश्यक है।

बढ़ती महंगाई में यह आम लोगों के लिए दिवाली गिफ्ट की तरह होगा। केंद्रीय बैंक ने लगातार सात बार से रेपो दर को 4 प्रतिशत के निचले स्तर पर बनाए रखा है। पिछली बैठक के दौरान आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि आरबीआई आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए जब तक आवश्यक हो, तब तक इस तरह सपोर्ट करने के लिए तैयार है। बता दें, आरबीआई की दर निर्धारण समिति एमपीसी ने बुधवार को तीन दिवसीय विचार-विमर्श शुरू किया था, जिसका आज आखिरी दिन था। 

शक्तिकांत दास ने फैसलों की जानकारी देते हुए कहा, पिछली एमपीसी बैठक के समय की तुलना में आज भारत बहुत बेहतर स्थिति में है। विकास दर मजबूत हो रही है, मुद्रास्फीति का अनुमान अपेक्षा से अधिक अनुकूल है। संकेत हैं कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। कोर मुद्रास्फीति स्थिर बनी हुई है।    

जुलाई-सितंबर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति अनुमान से कम थी। उन्होंने कहा, आरबीआई यह सुनिश्चित करेगा कि मुद्रास्फीति लक्ष्य सीमा के भीतर बनी रहे।

 आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास के इस ऐलान के बाद आम आदमी को राहत मिलनी तय है |

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