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Sputnik V वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट भारत में बनाएगा: DCGI

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ये लाइसेंस, जब तक निलंबित या निरस्त नहीं किया जाता है, 4 जून को जारी होने की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए लागू किया जाएगा।  आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि SII ने 18 मई को जेनेटिक मैनिपुलेशन (RCGM), जैव प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा समिति को भी आवेदन किया था, जिसमें स्ट्रेन / सीड लॉट और सेल बैंकों के इम्पोर्ट और अनुसंधान और विकास के लिए मंजूरी मांगी गई थी।

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) को कुछ शर्तों के साथ जांच, टेस्ट और विश्लेषण के लिए भारत में स्पुतनिक (Sputnik V) Covid​​​-19 वैक्सीन बनाने की अनुमति दी है। News18 ने शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि पुणे स्थित फर्म ने अपनी लाइसेंस प्राप्त हडपसर सुविधा में Sputnik V विकसित करने के लिए रूस में गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी, मॉस्को के साथ सहयोग किया है।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, "DCGI ने सीरम इंस्टीट्यूट को भारत में स्पुतनिक COVID-19 वैक्सीन के निर्माण, परीक्षण और विश्लेषण के लिए लाइसेंस प्राप्त हडपसर सुविधा में कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी है।" कंपनी ने इस संबंध में गुरुवार को DCGI को आवेदन दिया था।

DCGI की चार शर्तों के अनुसार, सीरम संस्थान को सेल बैंक और वायरस स्टॉक के ट्रांसफर के लिए अपने और गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के बीच समझौते की एक कॉपी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए समझौते की एक कॉपी पेश करनी होगी।

सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा, SII को सेल बैंक और वायरस स्टॉक इम्पोर्ट करने के लिए RCGM अनुमति की एक कॉपी और वायरल वेक्टर वैक्सीन Sputnik V के अनुसंधान और विकास को शुरू करने के लिए RCGM अनुमति की एक कॉपी पेश करनी होगी।

ये लाइसेंस, जब तक निलंबित या निरस्त नहीं किया जाता है, 4 जून को जारी होने की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए लागू किया जाएगा।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि SII ने 18 मई को जेनेटिक मैनिपुलेशन (RCGM), जैव प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा समिति को भी आवेदन किया था, जिसमें स्ट्रेन / सीड लॉट और सेल बैंकों के इम्पोर्ट और अनुसंधान और विकास के लिए मंजूरी मांगी गई थी।