झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। अब किसी भी कर्मचारी को प्रमोशन के लिए पात्र तभी माना जाएगा, जब वह पहले अपनी निर्धारित प्रोबेशन अवधि पूरी कर लेगा। इसके बाद ही प्रोन्नति के लिए आवश्यक सेवा अवधि की गणना शुरू होगी। यानी प्रोबेशन और प्रमोशन की सेवा अवधि अलग-अलग मानी जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पद पर दो साल का प्रोबेशन और दो साल की सेवा के बाद प्रमोशन का प्रावधान है, तो कर्मचारी को अब कुल चार साल सेवा करनी होगी।
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने इस संबंध में संशोधित संकल्प जारी किया है, जिसे हाल ही में राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिली थी। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक समानता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। हालांकि, झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। संघ का आरोप है कि नए नियम से कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए अधिक इंतजार करना पड़ेगा और विभिन्न सेवा संवर्गों के बीच असमानता बढ़ेगी।


