तंत्र साधना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है काल भैरवाष्टमी, जानिए तिथि

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तंत्र साधना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है काल भैरवाष्टमी, जानिए तिथि

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डेस्क। ज्योतिष के दृष्टिकोण से नवंबर का महीना बेहद ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। वहीं नवंबर महीने की शुरुआत ही गोपाष्टमी के साथ होगी इसके बाद अक्षय कूष्माण्ड नवमी, देव प्रबोधिनी एकादशी, बैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा आदि त्योहार भी इसी माह में पड़ेंगे।
जानिए त्योहारों की लिस्ट
गोपाष्टमी
अक्षय कूष्माण्ड नवमी 
तुलसी विवाह, देव प्रबोधनी एकादशी
बैकुंठ चतुर्दशी
कार्तिक पूर्णिमा
बालदिवस
भैरवाष्टमी
बालाजी जयंती
बालाजी जयंती
स्कंद षष्ठी
वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। वहीं इस दिन गाय की पूजा अर्चना भी की जाती है। मान्यता है इस दिन जो भी व्यक्ति सायं काल में गायों का पंचोपचार विधि से पूजन करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
वहीं कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय कूष्माण्ड नवमी भी मनाई जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। साथ ही इस दिन श्रीहरि विष्णु की भी उपासना होती है।
इसके बाद देवउठनी के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराने का विधान भी है। इसके साथ ही इसे देव प्रबोधिनी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से ही शादी विवाह भी शुरू हो जाते हैं। 
बता दें शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं इस दिन दीपदान का भी विशेष महत्व है। इसके साथ ही इस दिन गंगा सहित कई पवित्र नदियों में स्नान आदि का विधान है। वहीं पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले फल और पीली मिठाई का भोग भी लगाना चाहिए।
16 नवंबर (श्री काल भैरवाष्टमी)- 
भैरव अष्टमी तंत्र साधना करने के लिए अति विशेष मानी जाती है। साथ ही काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को शत्रुओं का भय भी नहीं रहता। शास्त्रों के अनुसार काल भैरव भगवान शिव का ही एक रूप बताएं गए है।
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