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Shankaracharya Jayanti : 12 वर्ष की आयु में ही वेदों और शास्त्रों पर अधिकार प्राप्त कर चुके थे आदिगुरु 

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डेस्क। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जब आदिगुरु शंकाराचार्य तीर्थ स्थानों की यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम पहुंचे तो वही उनकी मृत्यु हो गई। केदारनाथ में आज भी आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि बनी हुई है। 

केदारनाथ धाम में दर्शन करने के बाद हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुगण शंकराचार्य के दर्शन हेतु आते हैं, केदारनाथ धाम में आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि बेहद लोकप्रिय पर्यटक केंद्रों में से एक है।

बता दें कि हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आदि शंकराचार्य की जयंती मनाई जाती है। इस साल 6 मई शुक्रवार के दिन शंकराचार्य जयंती मनाई जा रही है। 

आपको बता दें आदिगुरु शंकराचार्य के जीवन से जुड़ी कुछ बातें

जब भारत में हिंदू धर्म की उपेक्षा हो रही थी और अन्य धर्मों का प्रभाव बढ़ने लगा था, उस समय आदि शंकराचार्य ने हिंदू धर्म के उत्कर्ष में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे देश में कई तीर्थ स्थलों की स्थापना की।

माना जाता है कि हिंदुओं को एक सूत्र में बांधने के लिए उन्होंने देश में 4 मठों की स्थापना की। वर्तमान में यही चारों मठ पूरे देश के संत संप्रदाय का आधार हैं ये मठ ही बाकी सबको निर्देशित करते हैं। 

कथाओं के अनुसार छोटी उम्र में ही आदि शंकराचार्य ने पूरे देश की यात्रा कर हिंदुओं का जाग्रत किया। 

ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य 8 वर्ष की आयु में ही चारों वेदों में निपुण हो गए, 12 वर्ष की आयु में वह सभी शास्त्रों में पारंगत, 16 वर्ष की आयु में शांकरभाष्य तथा 32 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर भी त्याग दिया। जो किसी सामान्य मानव के लिए सम्भव नहीं है।

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