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Home » Blog » बिहार में विपक्ष जूझ रहा भरोसेमंद नेतृत्व के अभाव से- भूपेंद्र यादव
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बिहार में विपक्ष जूझ रहा भरोसेमंद नेतृत्व के अभाव से- भूपेंद्र यादव

admin
Last updated: April 18, 2026 9:31 am
admin
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नई दिल्ली । भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव का मानना है कि बिहार में विपक्ष के पास मुद्दों और भरोसेमंद नेतृत्व का अकाल है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की स्थिति यह है कि मुख्य दल राजद अपने सहयोगियों का भरोसा खो रही है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व का उस टीम पर ही भरोसा नहीं रहा, जिसने उम्मीदवारों का चयन किया। भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव के मुताबिक, वर्तमान स्थिति में हो रहे इस चुनाव में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सोशल मीडिया का एक नए ढंग से प्रभाव इस चुनाव में नजर आ रहा है। अलग-अलग तरह के प्रयोग, वर्चुअल संवाद तथा सोशल मीडिया में अनेक नवाचार चुनाव में दिखने लगे हैं। सोशल मीडिया संवाद का माध्यम है। दलों के बीच सवाल-जवाब, बहस-मुबाहिसा तथा चर्चा-परिचर्चा का राजनीतिक विषयों के लिए खूब उपयोग हो रहा है। बिहार चुनाव को लेकर भाजपा, बिहार की तरफ से एक रोचक प्रयोग ‘ई बा’ गाने का दिखा है। पिछले पन्द्रह साल में एनडीए सरकार ने आधारभूत संरचना के विकास से लगाये बुनियादी जरूरतों के लिए अनेक काम किये हैं। अनेक ऐसी चीजें बनी हैं जो पन्द्रह साल पहले किसी की कल्पना में भी नहीं होती थीं। उन उपलब्धियों को इस गाने में सोशल मीडिया के माध्यम बताने का एक नवाचार दिखा है।

भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव, बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़े अपने अनुभवों को लेकर नियमित तौर पर डायरी लिख रहे हैं। उन्होंने पांचवीं डायरी के पांचवे संस्करण में पहले चरण के प्रचार अभियान के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा, एकतरफ वर्चुअल और सोशल मीडिया पर भाजपा सक्रिय है वहीं जमीन पर भी हमारे नेता कार्यकर्ता पूरी तरह से पहुंचे हैं। एनडीए सरकार के कार्यों को लेकर भाजपा नेता 3100 से ज्यादा पंचायतों तक जनसंपर्क कर चुके हैं। अभी मैं चुनाव प्रचार के लिए बांका, जमुई और कहलगांव गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के प्रति भय समाप्त हो रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि बिहार ने कोरोना के खिलाफ अत्यंत सफलता पूर्वक लड़ाई लड़ी है तथा लोगों का भरोसा हासिल किया है।

भाजपा महासचिव ने कहा कि चूंकि चुनाव प्रचार शुरू हो गया है तो चुनावी रौनकों का लौटना स्वाभाविक है। सुबह की सैर में होने वाली बैठकें हों अथवा घर-परिवार की चर्चा, चुनाव पर बातें शुरू हो गयी हैं। इस चुनाव की चर्चा में एक बात सभी मान रहे हैं कि विपक्ष मुद्दा और भरोसेमंद नेतृत्व दोनों के अभाव से जूझ रहा है। वहीं एनडीए के पास केंद्र और राज्य दोनों में भरोसेमंद परखे हुए मजबूत नेतृत्व है। साथ ही विकास की निरन्तरता का विश्वास भी लोगों के मन में है। विपक्ष की स्थिति यह है कि मुख्य दल आरजेडी अपने सहयोगियों का भरोसा खो रही है, वहीं कांग्रेस नेतृत्व का उस टीम पर ही भरोसा नहीं रहा, जिसने उम्मीदवारों का चयन किया।

भूपेंद्र यादव ने कहा, कहीं पढ़ा मैंने कि कांग्रेस ने टिकट तय करने वाली समिति के कुछ सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह सच है कि जब स्पष्ट नीति और मजबूत नेतृत्व होता है तो फैसले जनता के हक में तेजी से लिए जाते हैं। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू की गयी ‘स्वामित्व योजना’ इसका उदाहरण है। इस योजना से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी, भूमि विवाद के निपटारे में तेजी आएगी। निश्चित ही ऐसे ही गांव, गरीब, किसान, युवा, महिला, वंचित सभी के हित में सोचने वाली सरकार को एक बार फिर बिहार की जनता द्वारा सरकार बनाने का जनादेश मिलने जा रहा है।

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