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उत्तर प्रदेश

CAA Violence : सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है योगी सरकार हाई कोर्ट के आदेश को

admin
Last updated: April 19, 2026 12:32 pm
admin
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CAA Violence : सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है योगी सरकार हाई कोर्ट के आदेश को

लखनऊ। CAA Violence : नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन करने वालों के फोटोयुक्त बैनर-पोस्टर सार्वजनिक स्थलों से हटाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। हालांकि इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। इस संबंध में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मशविरा करके और उनके निर्देशानुसार ही लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सरकार अभी हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रही है। जो भी निर्णय लिया जाएगा, उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में लिया जाएगा। इधर, लखनऊ में हाई कोर्ट के आदेश से उपजे हालात पर चर्चा करने के लिए सोमवार को अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने लोकभवन में अफसरों के साथ बैठक की। बैठक में लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश, पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय और न्याय विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।

हाई कोर्ट ने लखनऊ में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों के फोटो लगे बैनर व पोस्टर को सार्वजनिक स्थलों से हटाने का आदेश देते हुए 16 मार्च को जिलाधिकारी लखनऊ व महानिबंधक से अनुपालन रिपोर्ट तलब की है। अदालत के रुख को देखते हुए अपर मुख्य सचिव गृह ने अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श किया।

सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के मसले पर सरकार शीर्ष अदालत के अधिवक्ताओं से भी विधिक परामर्श लेगी। होली के मौके पर मुख्यमंत्री अपने गृह जिले गोरखपुर में हैं। राज्य सरकार के पास कोर्ट के आदेश पर अमल करने के लिए लगभग एक हफ्ते का समय है। मुख्यमंत्री के लखनऊ वापस लौटने के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।

हाई कोर्ट ने दिये हैं पोस्टर-बैनर हटाने का निर्देश

बता दें कि सीएए के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन करने वालों के फोटो सहित पोस्टर, बैनर लगाने को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गलत माना है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार लोगों की निजता व जीवन की स्वतंत्रता के मूल अधिकारों पर अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कोर्ट ने लखनऊ के डीएम और पुलिस कमिश्नर को पोस्टर-बैनर हटाने का निर्देश दिया है और 16 मार्च को अनुपालन आख्या मांगी है। हाई कोर्ट ने कहा है कि  जब लोगों की निजता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा हो तो कोर्ट पीड़ित के आने का इंतजार नहीं कर सकती। लोक प्राधिकारियों की लापरवाही से मूल अधिकारों का हनन किया जा रहा हो तो न्यायपालिका को हस्तक्षेप करने का अधिकार है।

 

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