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Home » Blog » प्रशासन सरकार के मनसूबे पर फेर रहा पानी, नही हो पा रहा दर्जनों आश्रय केंद्रों का संचालन
उत्तर प्रदेश

प्रशासन सरकार के मनसूबे पर फेर रहा पानी, नही हो पा रहा दर्जनों आश्रय केंद्रों का संचालन

admin
Last updated: April 19, 2026 12:15 pm
admin
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धानेपुर (गोंडा) किसानों की सबसे बड़ी त्रासदी, छुट्टा मवेशियों का तांडव अब मानो दामन चोली का साथ बन चुका है सरकार ने करोड़ों रूपये पानी की तरह बहा कर आश्रय केंद्रों का निर्माण तो कराया किन्तु आज भी ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम ऐसी गौ शालाएं है जो दो वर्षो से निर्माणाधीन पड़े है न तो उनका निर्माण पूरा हो रहा है और न ही संचालन की कोई आस दिखाई दे रही है।

मुजेहना विकास खण्ड के ग्राम सभा त्रिलोक पुर में बनी गौ शाला करीब दो वर्षों से निर्माणाधीन है इस गौ आश्रय का गेट संचालन से पूर्व टूट चुका है परिसर में बने गार्ड रूम की छत से रिसाव होने लगा है, भूसा रखने के लिए बनाये गए स्टोर रूम का टीन शेड दो बार उड़ा और लगाया गया परिसर में लगे इंडिया मार्का हैण्डपम्प से आज तक पानी की एक बून्द भी किसी को नसीब नही हो पाई है।

यही हाल महेश भारी खौदी, तेंदुआ मोहिनी,पंडित परसिया सहित कई ग्राम पंचायतों में बनी गौ शालाओं का है, सभी का निर्माण तकरीबन अस्सी फीसदी पूरा हो चुका है बस थोड़े और प्रयासों के बाद संचालन ब्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती थी, किन्तु छोटी छोटी कमियों के चलते इन आश्रय केंद्रों के संचालन में आ रही बाधा में सबसे अहम रोल आश्रय केंद्र को जाने वाले रास्ते का है, दुर्जनपुर, त्रिलोकपुर, महेशभारी, बेसहुपुर, सहित जितने भी आश्रय केन्द्र ग्रामीण क्षेत्रों में बने हैं उनमे से कुछ ही आश्रय केंद्रों का रास्ता ठीक है ।

शेष आधा दर्जन आश्रय केंद्र ऐसी जगह चिन्हित कर बनवाये गए हैं जो नहर, तालाब, अथवा सुदूर रेहार बंजर की भूमि में बना हुआ है वहां तक पशुओं के लिए चारा इत्यादि संचालन सामाग्रियों को पहुंचाने वाले वाहन के लिए रास्ते का निर्माण कराया जाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए थी किन्तु इस विषय पर ध्यान न देने का परिणाम अब सामने है।

अपने मूल उद्देश्य से भटक चुके गौ आश्रय केंद्रों का सुधार न होने की वजह से अधिकतर किसानो ने अपने खेत के चारों तरफ कटीले तारों से बैरिकटिंग करा दी है ऐसे में छुट्टा पशुओं को ग्रामीण क्षेत्रों से छोटे कस्बों बाजारों की तरफ रुख करना पड़ रहा है नतीजन आश्रय केन्द्र से अधिक संख्या में सड़कों चैराहों पर मवेशियों के झुण्ड देखे जा रहे है।

दुर्दशा की तस्वीर बदले न बदले मताहतों की बदल गयी तकदीर
किसानों का दर्द और छूटा पशुओं की दुर्दशा की तस्वीर भले ही न बदली हो किन्तु उन लोगों की तकदीर बदल गयी जिन्होंने अपनी कूटनीति और ओछी राजनीति के दम पर गौ आश्रय केंद्रों के निर्माण की जिम्मेदारी हासिल की, लूट के खेल से तरक्की का प्रदर्शन किसी से छिपा नही पुरानी मोटर साइकिल से रॉयल इनफील्ड, लग्जरी कार सहित हर वो मुकम्मल चीज हासिल की गयी जिसे पाने के लिए एक मेहनतकश ईमानदार इंसान की पूरी जिंदगी निकल जाती है! अफसोस इस बात का है की जिनका भरोसा आम जनता करती है वही लोग सब कुछ जान कर भी अनजान बने रहते हैं जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ता है !

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