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भूपेन्द्र पटेल ने  ली गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ

भूपेंद्र पटेल के सात साल के कामकाज ने मोदी का मन मोहा
 
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अहमदाबाद में किया शानदार काम

अहमदाबाद 


संगी-साथी उन्हें प्यार से 'दादा' बुलाते हैं। घटलोदिया और मेमनगर के निवासियों के बीच भी वो इसी उपनाम से मशहूर हैं। अब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूं ही अपने गृह प्रदेश की कमान भूपेंद्र पटेल के हाथों नहीं सौंप दी है, बल्कि सात साल के उनके कामकाज ने मोदी का मन मोह लिया है। 



तब भूपेंद्र पटेल के मुरीद हो गए थे मोदी 


वर्ष 2010 से 2017 तक के पहले पांच वर्षों में अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति और फिर बाद के दो वर्षों तक अहमदाबाद अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (AUDA) के अध्यक्ष के तौर पर पटेल ने नौकरशाहों और नेताओं के बीच की खींचतान खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई। अधिकारियों और चुनकर आए जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल ने शानदार परिणाम दिए और अहमदाबाद में निगम ने कई विकास परियोजनाओं को सिरे चढ़ाया। 

पीएम मोदी ने दी बधाई 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटेल के शपथ ग्रहण लेने पर बधाई देते हुए भी पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'मैं उन्हें (भूपेंद्र पटेल को) वर्षों से जानता हूं और उनके शानदार कार्यों को देखा है- वो चाहे बीजेपी संगठन में हो या फिर नगर निगम और सामुदायिक सेवा में। वो निश्चित तौर पर गुजरात के विकास का पथ और प्रशस्त करेंगे।'

 

 



 

अहमदाबाद में किया शानदार काम 


वर्ष 2010 में थलतेज से पार्षद चुने जाने के बाद भूपेंद्र पटेल को अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की स्टैंडिंग कमिटी का चेयरमैन बना दिया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास के 'गुजरात मॉडल' का चेहरा अहदाबाद को ही बनाया था। अहमदाबाद को तब जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण अभियान (JNNURM) के तहत 2,700 करोड़ रुपये, बस रैपिड ट्रांजिट प्रॉजेक्ट (BRTS) के लिए 1,100 करोड़ रुपये के अलावा साबरमती रिवरफ्रंट के लिए दो चरणों में दी गई 1,200 करोड़ रुपये की रकम दी गई थी। इन योजनाओं के सही तरीके से जमीन पर उतारने में भूपेंद्र पटेल की बड़ी भूमिका रही। इतना ही नहीं, वर्ष 2011 में अहमदाबाद यूनेस्को (UNESCO) की संभावित विश्व धरोहर शहरों की सूची में भी शामिल हो गया। 

पूर्व निगम आयुक्त और लोकपाल सदस्य आईपी गौतम कहते हैं, 'मेरी नजर में वो एएमसी के जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों के बीच शानदार मध्यस्थ रहे हैं। वो बिल्कुल व्यावहारिक धरातल पर लोगों से डील करते थे। उनका बजट और नीति निर्माण के प्रति भी बड़ा व्यावहारिक नजरिया होता था। उनके साथ काम करना मेरे लिए गर्व की बात है।' 


गजब के मध्यस्थ हैं पटेल 


उनकी इन्हीं खासियतों के कारण बीजेपी ने उन्हें लगातार चार बार एएमसी चेयरमैन का पद दिया जो एएमसी के इतिहास में पहली बार था। उन्होंने अपनी मध्यस्थता कौशल की छाप कई मौकों पर छोड़ी। जब एएमसी में नया वेस्ट जोन जुड़ा तो प्रह्लादनगर, बोदकदेव, थलतेज, गोटा, घाटलोदिया, सरखेज, सोला और जोधपुर के इलाकों में नई-नई सड़कें और नालियां बनाने की राह में जबर्दस्त रोड़े आ रहे थे, तब पटेल ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। 

पटेल ने वर्ष 2012 में बिल्डिंग रेग्युलाइजिंग स्कीम को बढ़ावा देने के लिए शुल्क कटौती का आइडिया दिया तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सराहना की थी। एएमसी पार्षद और जलापूर्ति समिति के चेयरमैन जतिन पटेल कहते हैं, 'उन्होंने (भूपेंद्र पटेल ने) ही कई सोसाइटीज को सड़कें बनवाने और स्ट्रीट लाइटों की रिपेयरिंग के लिए पीपीपी स्कीम के दायरे में लाया था।' 

गुजरात में बीजेपी के तीसरे भूपेंद्र


पटेल ने वर्ष 2015 से 2017 तक एयूडीए चेयरमैन के तौर पर भी कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स को गति देने में काफी प्रमुख भूमिका निभाई थी। इनमें सानंद और बोपल में फ्लाइओवर्स और सड़कों के साथ-साथ कई अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स शामिल हैं जिन्होंने 2017 के चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 



बहरहाल, निवर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि गुजरात में तीसरे भूपेंद्र बीजेपी की प्रमुख हस्तियों में शुमार हो गए हैं। दरअसल, भूपेंद्र यादव गुजरात बीजेपी के प्रभारी हैं जबकि भूपेंद्र सिंह चूड़ास्मा गुजरात बीजेपी के सीनियर लीडर हैं और अब भूपेंद्र पटेल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

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