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कोविड-19 को देखते हुये 10 वीं 12 वीं की परीक्षा को रद्द किये जाने पर मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत 
 

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कोविड-19 को देखते हुये 10 वीं 12 वीं की परीक्षा को रद्द किये जाने पर मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत 

बोकारो से शेखर की रिपोर्ट


 झारखंड अभिभावक संघ व अभिभावकों की विनती को मानते हुए बच्चों के स्वास्थ के मद्देनजर झारखंड सरकार और एकेडमी काउंसिल द्वारा इस सत्र में आयोजित होने वाली 10वीं और 12वीं की परीक्षा को रद्द अहम फैसला लिया है, जो निश्चित रुप से प्रशंसनीय है. इस निर्णय का स्वागत करते हुए झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन,बोकारो जिलाध्यक्ष महेन्द्र राय ने कहा कि समय रहते झारखंड सरकार ने यह निर्णय ले लिया इसके लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देता हूं और हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. उल्लेखनीय है कि झारखंड अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष  अजय राय जी ने 48 घंटे का समय झारखंड सरकार को दिया था कि समय रहते राज्य सरकार इस पर निर्णय ले. अन्यथा झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से इस मुद्दे को लेकर आमरण अनशन किया जाएगा.

महेन्द्र राय ने कहा कि ऑनलाइन क्लास की शिक्षा से न छात्र संतुष्ट न अभिभावक। परीक्षा  से छात्र पर मानसिक तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे थे। उन्हें लगता था कि वह परीक्षा मैं सफल हो पाएंगे या नही। कुछ दिन पूर्व सीबीएसई बोर्ड ने भी छात्रों के स्थिति को देखते हुए परीक्षा रद्द की।  अब मुख्यमंत्री जी को निजी स्कूलों के मनमानी पर सख्त कदम उठाने की जरूरत। पिछले वर्ष जो आदेश जारी किया उसपर फिर से विचार करते हुए इस वर्ष भी जारी करे साथ ही साथ ऑनलाइन क्लास की फीस को तय करें। निजी स्कूलों द्वारा सिर्फ वीडियो व लिंक बना कर दिया जाता मगर जिन अभिभावको के 1 से अधिक बच्चें हैं उनके मोबाइल ,इंटरनेट आदि अतिरिक्त खर्च वाहन करना पड़ रहा। जिससे अभिभावको पर समस्या हो रही वह घर चलाये या ट्यूशन फीस दे।ऑनलाइन क्लास से छोटे छोटे बच्चों पर काफी दुष्प्रभाव हो रहा। बच्चो मैं चिड़चिड़ापन, आंखों की रोशनी, मेरुदंड,गर्दन में दर्द हो रही। सरकार को केबल के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा शुरू करने का निर्देश देनी चाहिए।

बोकारो जिला के सभी निजी स्कूलों से झारखंड अभिभावक संघ बोकारो जिला अभिभावको की समस्याओं को देखते हुए ऑनलाइन क्लास ट्यूशन फीस को कम करने की अपील करती। यही अभिभावक पूर्व मैं ससमय फीस दिया करते थे।आज उन्हें काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा। निजी स्कूल प्रबंधन को भी अभिभावको का दर्द समझना चाहिए। आज अभिभावक हैं तभी स्कूल भी हैं ।निजी स्कूल प्रबंधन मानवता का मिशाल दे।