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टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को बकाए पर 4 साल के मोरेटोरियम को मिली मंजूरी

संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कैबिनेट ने टेलिकॉम सेक्टर के लिए 9 स्ट्रक्टरल रिफॉर्म्स और 5 प्रोसेस को मंजूरी दी है
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4 साल का मोरेटोरियम 

मोदी कैबिनेट (Modi Cabinet) ने संकट से जूझ रहे टेलिकॉम सेक्टर (Telecom sector) के लिए आज राहत पैकेज को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) की परिभाषा को व्यावहारिक बनाने के साथ-साथ एजीआर पर 4 साल का मोरेटोरियम और टेलिकॉम सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट के जरिए 100% एफडीआई की अनुमति की मंजूरी शामिल है। 



बैठक के बाद संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कैबिनेट ने टेलिकॉम सेक्टर के लिए 9 स्ट्रक्टरल रिफॉर्म्स और 5 प्रोसेस को मंजूरी दी है। इन सुधारों से पूरे टेलिकॉम सेक्टर की तस्वीर बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज एजीआर पर साहसिक फैसला लिया है। एजीआर की परिभाषा को व्यावहारिक बनाने पर फैसला लिया गया है। सभी तरह के नॉन-टेलिकॉम रेवेन्यू को एजीआर से हटा दिया जाएगा। टेलिकॉम सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट के जरिए 100% एफडीआई की अनुमति दे दी है। 


4 साल का मोरेटोरियम 


वैष्णव ने कहा कि टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को बकाए पर 4 साल के मोरेटोरियम को मंजूरी दी गई है। जो इस सुविधा का लाभ उठाएंगे उन्हों मोरेटोरियम अमाउंट पर एमसीएलआर के साथ 2 फीसदी रेट पर ब्याज का भुगतान करना होगा। पेनाल्टी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इससे टेलिकॉम सेक्टर में भारी निवेश का रास्ता साफ होगा। निवेश से रोजगार पैदा होगा। यह निवेश से ज्यादा रोजगार का सवाल है। 

उन्होंने कहा कि पहले भारी ब्याज, लाइसेंस फीस पेमेंट पर ब्याज और पेनाल्टी, स्पेक्ट्रम यूजर चार्जेज और कई अन्य तरह के चार्ज लगते थे। आज इसे व्यावहारिक बनाया गया है। मंथली कंपाउंडिंग के बजाय अब एन्युअल कंपाउंडिंग होगी। स्पेक्ट्रम शेयरिंग की भी अनुमति दी गई है और यह पूरी तरह फ्री होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाली नीलामी में स्पेक्ट्रम की अवधि 20 साल के बजाय 30 साल होगी। अगर कोई स्पेक्ट्रम लेता हौ और बिजनस कंडीशंस या टेक्नोलॉजी बदलती है तो वह 10 साल के लॉकइन पीरियड के बाद स्पेक्ट्रम चार्ज देकर इसे सरेंडर कर सकता है। 

क्या होगा फायदा 


सूत्रों का कहना है कि एजीआर बकाये के भुगतान को आगे बढ़ाने से कंपनियों को ऑपरेशनल प्रॉफिटैबिलिटी में फायदा होगा। टेलिकॉम कंपनियों पर 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज है। इससे खासकर वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) को बड़ी राहत मिलेगी। कंपनी पर 1.9 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है जिसमें से 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक एजीआर और स्पेक्ट्रम पेमेंट्स है। वोडाफोन आइडिया के पास जून में 920 करोड़ रुपये का कैश और 1.9 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। कंपनी पर 58,254 करोड़ रुपये का बकाया है जिसमें से उसने 7,854 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है।

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