Jansandesh online hindi news

कानपुर - जाने आखिर क्यों लोग खुद ही देने लगे तालिबानी सजा

 | 
कानपुर - जाने आखिर क्यों लोग खुद ही देने लगे तालिबानी सजा
एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री प्रदेश में कानून व्यवस्था चाक-चौबंद होने का दावा कर रहे है तो वहीं कानपुर में इन दिनों दबंगो का तालिबानी राज चल रहा है.घटना होने पर दबंग पुलिस प्रशासन के पास मामला ले जाने के बजाय आरोपी को खुद ही सजा देने लगे हैं.साढ़ के एक धार्मिक स्थल पर चोरी के आरोप में युवक की पिटाई से पहले सचेंडी में भी इस तरह की घटना सामने आई थी. इसमें कुछ दबंगों ने एक किशोर को सब्जी चोर बताकर उसकी जमकर पिटाई की थी और उसके कपड़े उतारकर चकरपुर मंडी परिसर में घुमाया था.

तो वहीं पुलिस पहले घटना की जानकारी होने से इंकार करती रही थी .बाद में मामला मीडिया में आने के बाद केस दर्ज किया गया था. घटना से आहत किशोर शहर से पलायन करने को मजबूर हो गया था.घटना के तीन दिन बाद वह प्रयागराज में मिला था.मामले में दो आरोपितों के गिरफ्तार कर पुलिस ने अपने काम से इतिश्री तो जरूर कर ली.लेकिन मानवता को शर्मसार करने वाली घटना के कुछ दिन बाद ही साढ़ में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है.

कानपुर के बाहरी इलाकों को में भी लागू हो कमिश्नरेट
सूबे के चार जिलों में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू की गई है.इसमें कानपुर भी शामिल है. लेकिन, सचेंडी व साढ़ थाना क्षेत्र को इससे बाहर रखा गया है.कमिश्नरेट लागू करने से पीछे का उद्देश्य बेहतर पुलिसिंग प्रणाली व लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास कायम करना था.साढ़ और सचेंडी में हुई घटनाओं के बाद इन क्षेत्रों को भी कमिश्नरी के अंर्तगत लाने की जरूरत महसूस होने लगी है. जिससे क्षेत्र में बेहतर कानून व्यवस्था लागू हो सके व इस तरह की घटनाओं का पुनरावृत्ति दोबारा न हो सके.

लोगों में सहनशक्ति का स्तर हुआ कम
मनोचिकित्सक डा. अराधना गुप्ता ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण बीते दिनों लागू लाकडाउन के चलते लोगों का सहनशक्ति का स्तर अपेक्षाकृत कम हो गया है, जिससे लोग इस तरह के त्वरित निर्णय खुद ही ले रहे हैं. इसके अलावा आर्थिक संकट भी इसकी एक प्रमुख वजह है.उन्होंने बताया कि समाज का एक खास वर्ग इस तरह की घटनाओं के पीछे जिम्मेदार है. इसके अलावा पुलिस की नकारात्मक छवि व न्याय मिलने में लगने वाले समय के चलते भी लोग इस तरह के कदम उठा रहे है.