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 स्मारकों के निर्माण में कुछ आरोपियों के खिलाफ एंटी करप्शन एक्ट की धारा 13(1)(डी) (13) (2) में चार्जशीट दाखिल की गई 

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 स्मारकों के निर्माण में कुछ आरोपियों के खिलाफ एंटी करप्शन एक्ट की धारा 13(1)(डी) (13) (2) में चार्जशीट दाखिल की गई 

लखनऊ

2007 से लेकर 2011 के बीच में मायावती सरकार (Mayawati Government) के दौरान लखनऊ (Lucknow) और नोएडा (Noida) में दलित महापुरुषों के नाम पर बने स्मारक और पार्कों के निर्माण में अरबों रुपए के घोटाले (U Memorial Scam) में विजिलेंस ने सोमवार को 57 आरोपियों के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी. एमपी-एमएलए कोर्ट के स्पेशल जज पवन कुमार राय ने चार्जशीट पर संज्ञान के बिंदु पर सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है. कुछ आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 और 120 बी में चार्जशीट दाखिल की गई है, जबकि कुछ आरोपियों के खिलाफ एंटी करप्शन एक्ट की धारा 13(1)(डी) (13) (2) में चार्जशीट दाखिल की गई है.

आपको बताते चलें कि 2007 से 2011 के दौरान स्मारकों के निर्माण में घोटाले का खुलासा तत्कालीन लोकायुक्त की रिपोर्ट में हुआ था. लोकायुक्त ने अपनी जांच में पाया कि निर्माण में खर्च की गई रकम का करीब 34 फ़ीसदी यानी करीब 14 अरब 10 करोड़ रुपया आपराधिक साजिश करके गबन किया गया. इस रिपोर्ट में लोकायुक्त ने गबन और भ्रष्टाचार पर एफआईआर कर विवेचना की सिफारिश की थी.

इन्हें बनाया गया है आरोपी
लोकायुक्त ने अपनी जांच में लखनऊ और नोएडा में स्मारक और पार्क निर्माण के लिए खरीदे गए सैंड स्टोन में अरबों के घोटाले का खुलासा किया था. 1 जनवरी 2014 को विजिलेंस की ओर से इस मामले में गोमती नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, खनन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा समेत राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक सीपी सिंह ,अपर परियोजना प्रबंधक राकेश चंद्रा, अपर परियोजना प्रबंधक एसके सक्सेना और तमाम अधिकारियों को नामजद आरोपी बनाया गया था. योगी आदित्यनाथ की सरकार  बनने के बाद विजिलेंस इस मामले की विवेचना में तेज़ी लाई और चार्जशीट दाखिल की. माना जा रहा है कि इस घोटाले में विजिलेंस एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाख़िल कर सकती है जिसमें तत्कालीन नेताओं का ज़िक्र हो सकता है.

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