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कोर्ट ने नगर कोतवाल और सदर तहसील के नायब तहसीलदार को जेल भेजने की सजा सुनाई

अदालत की इस सख्त कार्रवाई से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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न्यायालय में अवमानना की शिकायत 

बाराबंकी | उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में अदालत की अवमानना करने पर कोर्ट ने नगर कोतवाल और सदर तहसील के नायब तहसीलदार को जेल भेजने की सजा सुनाई है। अदालत की इस सख्त कार्रवाई से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आरोप है कि नगर कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर अमर सिंह और सदर तहसील के नायाब तहसीलदार केशव प्रसाद ने मिल कर शहर के एक निर्माण पर स्टे होने के बावजूद जबरन उसे गिरा दिया था। इस पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली थी।  

जानकारी के अनुसार सोमवार को न्यायालय परिसर में उस समय अफ़रातफ़री मच गई जब न्यायालय की अवहेलना करने पर कोर्ट नम्बर-13 के सिविल जज जूनियर डिवीजन खान जीशान मसूद ने नगर कोतवाल अमर सिंह और नायाब तहसीलदार केशव प्रसाद को तलब कर कटघरे में खड़ा कर लिया। पुलिस-प्रशासन पर आरोप है कि सदर तहसील नवाबगंज के अलापुर में भूमि की गाटा संख्या -1533 पर मोहम्मद आलम बनाम मोबिना बानो के बीच कब्जेदारी को लेकर विवाद चल रहा था।
 


इस मामले में आलम के शिकायत पर न्यायालय ने 1अगस्त 2021 को रोक लगाते हुए स्थगन आदेश दिया था लेकिन विपक्षी ने लगातार जमीन कब्जा करने का प्रयास किया और 9 अगस्त 2021 को न्यायलय के आदेश को दरकिनार करते हुए पुलिस प्रशासन ने पीड़ित की दीवार गिरा दी थी।       


न्यायालय में अवमानना की शिकायत 


वकील अखिलेश मौर्य ने बताया कि पीड़ित मोहम्मद आलम की ओर से 12 अगस्त 2021 को न्यायालय में अवमानना को लेकर प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद 5 अगस्त को विपक्षी के साथ शहर कोतवाल अमर सिंह आए और निर्माण काम को रोक दिया। इसके बाद 6 अगस्त को विपक्षी के साथ नायब तहसीलदार केशव प्रताप सिंह और लेखपाल प्रह्लाद नरायण तिवारी आए। इन लोगों ने कोर्ट के स्थगनादेश के बावजूद विवादित भूमि की पैमाईश की और मशीन लगाकर दीवार गिरा दी थी। 

इसकी शिकायत पर कोतवाल ने न्यायालय में सारी घटना मान ली। इस पर सिविल जज जूनियर डिवीज़न कोर्ट नम्बर-13 के जज खान जिशान मसूद ने सोमवार को आरोप पाए जाने पर कोतवाल अमर सिंह को 3 दिनों का सिविल कारावास और नायाब तहसीलदार केशव प्रसाद को एक महीने सिविल कारावास की सजा सुनाई। 



अपर जिला सत्र न्यायालय से मिली राहत 


कोतवाल और नायाब तहसीलदार को न्यायालय से सजा मिलने पर प्रशासनिक अमले में हड़कम्प मचा दिया। इस दौरान अफसरों की दी गई ज़मानत याचिका को न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया। मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम त्रिनेत्र ने कोर्ट नम्बर-13 के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर लगाई है।

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