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ज्ञानेश्वर हत्याकांड : पूर्व विधायक चन्द्रभद्र सिंह सोनू को शीर्ष अदालत ने सुल्तानपुर के जिला जज को नोटिस जारी

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ज्ञानेश्वर हत्याकांड : पूर्व विधायक चन्द्रभद्र सिंह सोनू को शीर्ष अदालत ने सुल्तानपुर के जिला जज को नोटिस जारी

यूपी के सुल्तानपुर में पूर्व विधायक चन्द्रभद्र सिंह सोनू की मुश्किले बढ़ गई है. सुप्रीम कोर्ट ने उनके व उनके भाई यशभद्र सिंह मोनू समेत पांच लोगों के खिलाफ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए है. यह नोटिस इलाहाबाद के हंडिया थाना क्षेत्र में साल 2006 में हुए संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड के मामले में है. दरअसल, संत ज्ञानेश्र्वर और सोनू-मोनू के पिता इंद्रभद्र सिंह के बीच पुरानी रंजिश थी.  जिसके चलते उनकी हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि इसका बदला इन दो भाइयों ने संत ज्ञानेश्वर की हत्या करवाकर लिया था. शीर्ष अदालत ने सुल्तानपुर के जिला जज को नोटिस जारी कराने की जिम्मेदारी दी है. मामले की सुनवाई 23 अगस्त को होगी.

सदानंद तिवारी उर्फ संत ज्ञानेश्वर ने जिले के कूरेभार थाना क्षेत्र के मझवारा गांव में 1994 में आश्रम बनाना शुरू किया था. गांव के चौकीदार रामजस यादव ने आश्रम के लिए अपनी जमीन देने का विरोध किया था. जिस पर ज्ञानेश्वर के शिष्यों ने रामजस की हत्या करा दी थी. चंद्रभद्र सिंह उर्फ सोनू के पिता इंद्रभद्र सिंह उस समय इसौली के विधायक थे. उन्होंने रामजस के परिवार वालों का साथ दिया. जिसके बाद वहां का जनसमूह ज्ञानेश्वर के आश्रम के खिलाफ हो गया. भीड़ ने आश्रम को उखाड़ फेंका. इसके बाद से ही ज्ञानेश्वर और इंद्रभद्र सिंह में ठन गई. हालांकि बाद में ज्ञानेश्वर ने वहां आश्रम बनवा लिया. 21 जनवरी 1999 को इंद्रभद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी. इसमें ज्ञानेश्वर के एक शिष्य दीनानाथ समेत पांच लोग आरोपी बनाए गए. जिन्हें बाद में सजा भी हुई. ज्ञानेश्वर के खिलाफ भी हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया था.

संत ज्ञानेश्वर छात्र जीवन से ही अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया था. गोपालगंज के डीएम की हत्या में तमाम लोगों के साथ ज्ञानेश्वर भी नामजद हुआ था. बाद में वह सुप्रीम कोर्ट से छूटा. इसके अलावा एक मुस्लिम महिला की हत्या समेत अन्य कई गंभीर मामले में उसका नाम आया था. पुलिस से बचने के लिए ही उसने भगवा चोला पहना था. उसने बाराबंकी में भी सिद्धौर आश्रम बनवाया था. वाराणसी, अयोध्या समेत कई धार्मिक शहरों में संत ज्ञानेश्वर के एक के बाद एक आश्रम खुलते चले गए.
इंद्रभद्र सिंह की मौत के बाद सोनू-मोनू और ज्ञानेश्वर के बीच दुश्मनी हो गयी. 10 फरवरी 2006 को इलाहाबाद के माघमेला में अंतिम स्नान के लिए संत अपने शिष्यों के साथ आया था. जिसके बाद वह अपने पूरे काफिले के साथ वाराणसी के लिए निकला था. इसी दौरान हथियारों से लैस शूटरों ने ज्ञानेश्वर की गाड़ी को निशाना बनाकर उस पर फायर झोंक दिया। उन लोगों ने सैकड़ो गोलियां दाग दी थीं. फायरिंग में ज्ञानेश्वर के साथ मौजूद पुष्पा, पूजा, नीलम, गंगा, ओमप्रकाश, रामचंद्र, मिथिलेश की मौत हो गई थी.  जबकि दिव्या, मीरा, संतोषी, अनीता, मीनू गंभीर रूप से घायल हो गई थी.

ज्ञानेश्वर के भाई इंद्रदेव तिवारी ने सुल्तानपुर के पूर्व विधायक सोनू सिंह और उनके भाई यशभद्र सिंह मोनू समेत अन्य लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर की थी. जिसके बाद सोनू,मोनू, विजय यादव व अखिलेश सिंह निवासी आजमगढ़ को जेल भी जाना पड़ा था. हालांकि, गवाहों के पलटने से सभी आरोपियों को सत्र न्यायालय इलाहाबाद ने बरी कर दिया था. फिर सेशन कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. वहां भी ज्ञानेश्वर के भाई को सफलता नहीं मिली. इंद्रदेव तिवारी ने अब शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जहां पर उसने हाईकोर्ट की कार्रवाई को चुनौती देते हुए स्पेशल लीव पेटिशन (क्रिमिनल) अपने वकील से दाखिल करवाई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायमूर्तियों की पीठ ने प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश के अलावा सोनू,मोनू व सह आरोपी बने विजय यादव व अखिलेश सिंह के खिलाफ नोटिस जारी कर भेजने का आदेश दिया है.