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'ईद-उल-अजहा : गाइडलाइन के तहत मास्क, सोशल डिस्टेंस का ख़ास ख़्याल रखा जाए. किसी से हाथ न मिलाएं, न ही गले मिलें

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'ईद-उल-अजहा : गाइडलाइन के तहत मास्क, सोशल डिस्टेंस का ख़ास ख़्याल रखा जाए. किसी से हाथ न मिलाएं, न ही गले मिलें
लखनऊ. ईद उल अज़हा (बकरीद) (Eid-ul-Adha) के मौक़े पर इस्लामिक सेन्टर ऑफ इंडिया (Islamic Centre Of India) ने एडवायजरी (Advisary) जारी की है. सेंटर के प्रमुख मौलाना ख़ालिद रशीद फरंगी महली (Maulana Khalid Rasheed Farangi Meheli) ने गाइडलाइन के तहत सिर्फ 50 लोग मस्जिद में नमाज़ अदा करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इस दौरान मास्क, सोशल डिस्टेंस का ख़ास ख़्याल रखा जाए. किसी से हाथ न मिलाएं, न ही गले मिलें.

फरंगी महली ने कहा है कि उन्ही जानवरों की कुर्बानी करें, जिन पर क़ानूनी बंदिश नहीं हो. उन्होंने लोगों से अपील की है कि सड़क किनारे गली और और पब्लिक स्थान पर क़ुर्बानी न करें. साथ ही कहा है कि गोश्त का तीसरा हिस्सा गरीबों में तक़सीम करें. फरंगी महली ने कहा कि लोग क़ुर्बानी की फ़ोटो और वीडियो आदि सोशल मीडिया पर न डालें. नमाज़ के बाद कोविड के ख़ात्मे की दुआ करें.

बता दें बकरीद को ही ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है, जो इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है. बकरीद का त्योहार रमजान महीना खत्म होने के 70 दिन के बाद मनाया जाता है. इस दिन इस्लाम धर्म के वाले मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद जानवरों की कुर्बानी देते हैं. भारत में इस बार 21 जुलाई को बकरीद मनाई जाएगी. कोरोना को देखते हुए बकरीद की रौनक थोड़ी फीकी रहेगी. इस खतरनाक संक्रमण से बचे रहने के लिए राज्य सरकार ने भी कई तरह की गाइडलाइंस जारी की हैं.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बकरीद को लेकर गाइडलाइन जारी की है. कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी धार्मिक स्थलों के लिए भी दिशा निर्देश जारी किए हैं. जिसके मुताबिक किसी भी धार्मिक स्थल पर सामूहिक रूप से भीड़ इकट्ठा नहीं की जा सकती है. ईद के किसी भी आयोजन में 50 से ज्यादा लोग जमा नहीं होंगे.