Jansandesh online hindi news

पहले बारिश और अब बाढ़ ने बर्बाद की किसानों की फसल
 

 | 
पहले बारिश और अब बाढ़ ने बर्बाद की किसानों की फसल

पवन कुमार की रिपोर्ट

तराई इलाके को बाढ़ से बचाने के लिए हर साल सरकार द्वारा लागू की गई करोड़ों की योजनाओं पर काम शुरू होता है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह काम बाढ़ आने से पहले पूरा नहीं हो पाता है। इसकी वजह से सरकार की तरफ से ग्रामीणों को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए खर्च की गई रकम बर्बाद हो जाती है। और वहीं लोगों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ता है। अयोध्या जिले के रुदौली तहसील अंतर्गत स्थित ग्राम अब्बूपुर, सल्लाहपुर, कैथी, मंहगू का पुरवा व कैथी मांझा का नजारा इस बार भी कुछ ऐसा ही है।

अब जब नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा तो काम की रफ्तार बढ़ाई जा रही है ग्रामीणों की मानें तो काम के नाम पर अधिकारी केवल खाना पूर्ति कर रहे है।ग्रामीणों की अगर मानें तो उनके गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए जो जियो और ईसी बैग मिट्टी भरवाकर नदी डलवाए हैं, वह काफी नहीं हैं।क्योंकि उसकी ऊंचाई कम है ऐसे में इन बैग को डलवाने का क्या फायदा ऐसे में ग्रामीणों ने शंका जताई कि इस काम में कोई बड़ा घोटाला भी हो सकता है क्योंकि जियो बैग महंगे होते हैं।

और ईसी बैग सस्ते इसीलिए जियो बैग की जगह ईसी बैग का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है, जिससे सरकार द्वारा जारी बजट की बंदरबांट हो सके क्योंकि नदी में कितने बैग पड़े, इसको कोई देखने वाला भी नहीं रुदौली में घाघरा नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला गांव कैंथी मंझा,जो प्रतिवर्ष बाढ़ की चपेट में आता है

जिले में करीब 85 किमी नदी की लंबाई है रुदौली तहसील में कैथी माझा निवासी श्री दत्त ने मीडिया को बताया कि इस गांव की आबादी लगभग 70 घरों की है। इस बार नदी में बाढ़ के कारण होने वाले कटान से नुकसान सबसे ज्यादा गन्ना व धान की फसलों को हुआ है इस बार हजारों बीघा फसल जल मग्न हो चुकी है। वही कृष्णा देवी,पार्वती देवी,सीता पति, व शिव बहादुर ने मीडिया को बताया कि लगभग 1 माह से बाढ़ की स्थिति ऐसे ही बनी हुई है पर तहसील व बाढ़ नियंत्रण इकाई से कोई भी अधिकारी बाढ़ का जायजा लेने के लिए इस और नहीं आया ना ही किसी डॉक्टर की व्यवस्था कराई गई है।

आपातकालीन स्थिति में हमारे पास कोई भी साधन नहीं है और ना ही प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई है यही स्थिति हम लोगों के लिए प्राणघातक है।प्राथमिक विद्यालय, पंचायत भवन एवं तटबंध के किनारे इनके रहने की अस्थाई व्यवस्था तहसील प्रशासन करता है बेघर होने पर सबसे बड़ी समस्या इनके सामने मवेशियों के चारे की होती है।ऐसी तस्वीर प्रतिवर्ष नदी के किनारे के इलाकों में देखने को मिलती है आज तक इनके लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया जा सका।

Text Example

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।