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कृषि कानून वापस होने के फैसले पर लोगों में खुशी, आंदोलन में किसानों की हुई मौत पर आर्थिक मदद करें सरकार 

सरकार ने शुक्रवार को तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने का एलान कर दिया है। जिसको लेकर किसान नेताओं और राजनीतिक दलों ने खुशी जताई है। किसान भी इसे हक की जीत बता रहे हैं। कुशीनगर में भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष ध्रुवनारायण यादव इसे किसान नेता इस फैसले को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं की जीत बता रहे हैं।
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कृषि कानून वापस होने के फैसले पर लोगों में खुशी,आंदोलन में किसानों की हुई मौत पर आर्थिक मदद करें सरकार 

कृषि कानूनों पर कुशीनगर के नेता व्यापार मंडल के अध्यक्ष की प्रक्रिया

कांग्रेसी नेता मनीष जायसवाल मंटू और पूर्व सांसद बालेश्वर यादव ने किया हार का जिक्र,शाहिद लारी बोले

उपेंद्र कुशवाहा

पडरौना,कुशीनगर। सरकार ने शुक्रवार को तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने का एलान कर दिया है। जिसको लेकर किसान नेताओं और राजनीतिक दलों ने खुशी जताई है। किसान भी इसे हक की जीत बता रहे हैं। कुशीनगर में भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष ध्रुवनारायण यादव इसे किसान नेता इस फैसले को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं की जीत बता रहे हैं। किसान आंदोलन की इस जीत में राकेश टिकैत के आंसुओं का और लगातार चल रही महापंचायतों का सबसे बड़ा योगदान रहा। इन महापंचायतों में न सिर्फ किसानों का सैलाब उमड़ा,बल्कि बदलते सियासी समीकरणों की ओर भी ध्यान खींचा। 

सपा नेता शाहिद लारी ने कहा भाजपा सरकार ने तीनों काले कृषि कानूनों से गरीबों किसानों को पूंजीपतियों के गुलाम बनाना चाहा,सड़कों पर कील लगाई, बाल खीचते कार्टून बनाए, किसानों पर जीप चढ़ाई लेकिन किसान न डरे नही झुके। लगातार चुनावों और उपचुनावों में भाजपा की करारी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव विजय रथ यात्रा में उमड़ रहे जनजनसैलाब को देखकर भाजपा को अपनी करारी हार का एहसास हो गया था। एसे में डैमेज कंट्रोल के लिए काले-क़ानून वापस लेने की घोषणा की गई है। सपा नेता श्री लारी ने सवाल उठाया कि भाजपा बताए सैकड़ों किसानों की मौत का जिम्मेदार कौन है ? दोषियों को सज़ा कब मिलेगी ? आगामी 2022 के  चुनाव में जनता। किसानो की हुई मौतों का हिसाब भाजपा सरकार से जरुर लेगी।

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश मंत्री और जिला अध्यक्ष सचिन चौरसिया ने कहा केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद निश्चित रूप से एक साल से चल रहे आंदोलन को सफलता प्राप्त हुई है। इसमें किसानों की जीत हुई है,इन कानूनों को वापस लेने के बाद देश का किसान उन्नति करेगा और इसका असर कहीं ना कहीं व्यापार पर भी पड़ेगा व्यापार की स्थिति भी अब सुधरेगी एसे में किसान खुशहाल होगा तो व्यापारी भी खुशहाल होगा। कांग्रेसी नेता मनीष जयसवाल मंटू ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान जिन किसानों की मौत हुई है,उन्हें आर्थिक मदद दे। उनके परिवार में से एक सदस्य को सरकारी नौकरी ज़रूर दी जाए। कृषि क़ानूनों को रद्द करने का निर्णय बहुत पहले ले लिया जाना चाहिए था। सरकार अगर यह फ़ैसला काफी पहले ले लेती तो देश अनेक प्रकार के झगड़ों से बच जाता।

सपा नेता और पूर्व सांसद ने बालेश्वर यादव ने कहा कि अमीरों की भाजपा ने भूमिअधिग्रहण व काले क़ानूनों से ग़रीबों-किसानों को ठगना चाहा। कील लगाई, बाल खींचते कार्टून बनाए,जीप चढ़ाई लेकिन सपा की पूर्वांचल की विजय यात्रा के जन समर्थन से डरकर काले-क़ानून वापस ले ही लिए। भाजपा बताए सैंकड़ों किसानों की मौत के दोषियों को सज़ा कब मिलेगी।

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