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जब तक CRPC में संशोधन नही हो जाता तब तक कोई एसपी तय नही कर सकता कि NCR की जगह FIR लिखी जाए- नरेंद्र अवस्थी 

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जब तक CRPC में संशोधन नही हो जाता तब तक कोई एसपी तय नही कर सकता कि NCR की जगह FIR लिखी जाए- नरेंद्र अवस्थी 

उन्नाव

 लखनऊ में  अपर मुख्य सचिव के निजी सचिव के गोली मारकर आत्महत्या करने के  प्रकरण के बाद उन्नाव एसपी ने जनपद में  सभी मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इससे अब मारपीट समेत अन्य मामलों में एनसीआर दर्ज कर थाना पुलिस  टालने की कोशिश नहीं कर पाएगी। अभी तक दो पक्षों में मारपीट की घटनाओं में पीड़ित के तहरीर देने पर पुलिस इसे असंज्ञेय अपराध मानकर एनसीआर (नॉन कॉग्निजबेल) दर्ज कर आरोपी पक्ष के साथ पीड़ित का भी शांतिभंग में चालान कर देती थी। एसडीएम न्यायालय से उसी दिन जमानत मिलने व कड़ी कार्रवाई न होने से मारपीट करने वाला आरोपी पीड़ित पर रौब गांठता था। निजी सचिव विशंभर प्रकरण के बाद एसपी अविनाश पांडेय ने जिले सभी थानों में एनसीआर दर्ज करने पर तत्काल रोक लगा सभी मामलों में एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज किए जाने के आदेश दिए हैं। इससे कई वर्षों तक आरोपी को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।

एनसीआर में धाराएं बढ़ाने में  सुस्ती बरती जाती थी।अभी तक पुलिस एनसीआर दर्ज कर पीड़ित का मेडिकल कराती थी। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोट की पुष्टि होने पर विवेचना और आरोप पत्र दाखिल करने से बचने के लिए पुलिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एनसीआर को रिपोर्ट में तरमीम करने के लिए पीड़ित को महीनों टरकाती थी। इससे पीड़ित को समय पर इंसाफ नहीं मिल पाता था। लखनउ में गोली मारकर आत्महत्या करने वाले निजी सचिव विशंभर दयाल   के  प्रकरण में  उन्नाव के औरास थाने में भांजे की तहरीर पर पुलिस ने विपक्षियों के खिलाफ एनसीआर दर्ज कर पीड़ित का मेडिकल कराया। मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोट की पुष्टि होने के बाद भी कई महीनों तक पुलिस ने एनसीआर को एफआईआर में तरमीम नहीं किया। जिसके बाद निजी सचिव ने पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर  गोली मारकर आत्महत्या कर कर लिया था।

मामला चर्चित होने के बाद उन्नाव।एसपी अविनाश पांडेय  ने औरास के प्रभारी निरीक्षक हरप्रसाद अहिरवार व विवेचक तमीजुद्दीन को निलंबित कर दिया था। उन्नाव के पूर्व बार एसोसिएशन अध्य्क्ष नरेंद्र अवस्थी एडवोकेट ने बताया कि जब तक सीआरपीसी में  संशोधन नही हो जाता तब  तक कोई एसपी तय नही कर सकता कि एनसीआर  की जगह एफआईआर लिखी जाए एनसीआर नही।  अगर किसी की पत्नी भाग जाती है तो एनसीआर में रिपोर्ट दर्ज की जाएगी ना  की एफआईआर में । एनसीआर में धारा 323, मारपीट, 504 गाली गलौज) 427 नुकसान पहुंचाना 498 अपनी मर्जी से विवाहित महिला के भाग जाने समेत कुछ अन्य धाराएं आती हैं। प्रदेश में धारा 506 (जान से मारने की धमकी) को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। मारपीट के मामलों में पीड़ित अक्सर जान से मारने की धमकी का शिकायती पत्र देता है। पहले इसे एनसीआर में दर्ज कर पुलिस अपना पल्ला झाड़ लेती थी। 

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