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UP CHUNAV : पूर्वांचल के बाहुबली सलाखों के पीछे से लड़ेंगे UP चुनाव 

सलाखों के पीछे से और बाहर से यानी जो जहां हैं, वह जोर-जुगत लगाकर माननीय का तमगा हासिल करना चाहता हैं। शह-मात के इस खेल में आगामी 10 मार्च को यह बात देखने लायक होगी कि किस बाहुबली का सियासी रसूख बचता है और किसे फिर 5 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। पूर्वांचल की सियासत की बात हो और बाहुबलियों का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता है।
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UP CHUNAV : पूर्वांचल के बाहुबली सलाखों के पीछे से लड़ेंगे चुनाव 

सलाखों के पीछे से और बाहर से यानी जो जहां हैं, वह जोर-जुगत लगाकर माननीय का तमगा हासिल करना चाहता हैं। शह-मात के इस खेल में आगामी 10 मार्च को यह बात देखने लायक होगी कि किस बाहुबली का सियासी रसूख बचता है और किसे फिर 5 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है। पूर्वांचल की सियासत की बात हो और बाहुबलियों का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता है। खासतौर से विधानसभा, जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में तो पूर्वांचल में बाहुबली निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अब जबकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है तो एक बार फिर बाहुबली जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए बेताब हैं।

मुख्तार अंसारी : पुलिस डोजियर के अनुसार अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना माफिया मुख्तार अंसारी का नाम 90 के दशक में गाजीपुर, मऊ और आजमगढ़ जिले में आपराधिक गतिविधियों में सामने आने लगा था। 1996 में मुख्तार को मऊ की जनता ने पहली बार बसपा के सिंबल पर विधायक चुना और धीरे-धीरे वह माफिया बृजेश सिंह के विरोधी खेमे के सरगना बन गए। अब तक लगातार 5 बार विधायक चुने गए मुख्तार फिलहाल किसी दल में नहीं हैं। लेकिन, यह तय माना जा रहा है कि बांदा जेल में बंद मुख्तार 2022 का चुनाव मऊ सदर विधानसभा से सुभासपा के बैनर तले लड़ेंगे और सपा व अपना दल का समर्थन उन्हें प्राप्त होगा।

विजय मिश्रा : भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा से बाहुबली विजय मिश्रा 2002 से 2017 तक लगातार चार बार विधायक चुने गए। भदोही और प्रयागराज में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले विजय मिश्रा ने सियासी सफर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की थी। मौजूदा समय में वह निषाद पार्टी में हैं। आगरा जेल में बंद विजय मिश्रा इस बार भी विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। पार्टी कौन सी होगी, यह तो अभी तय नहीं है, लेकिन उनके समर्थकों का दावा है कि वो एक बार फिर विधानसभा पहुंचने में सफल रहेंगे।

धनंजय सिंह : कोलकाता में जन्मे और जौनपुर के मूल निवासी धनंजय सिंह 2 बार विधायक और एक बार सांसद रहे। साल भर पहले लखनऊ में हुए अजीत सिंह हत्याकांड में वांछित इनामी धनंजय सिंह ने फरार रहने के दौरान ही अपनी पत्नी श्रीकला रेड्‌डी को जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया। धनंजय फरार रहने के बावजूद अकसर सार्वजनिक स्थान पर दिखाई दे ही जाते हैं और यह माना जा रहा है कि जौनपुर की मल्हनी विधानसभा से एक बार फिर वह दमखम ठोकते नजर आएंगे।

बृजेश सिंह : पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी के धुर विरोधी खेमे के अगुआ और पुलिस डोजियर के अनुसार अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना बाहुबली बृजेश सिंह मौजूदा समय में वाराणसी की सेंट्रल जेल में बंद हैं। बृजेश मौजूदा समय में एमएलसी हैं और इससे पहले उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह भी इस पद पर निर्वाचित हो चुकी हैं। बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह चंदौली जिले से 2007 से लगातार 3 बार से विधायक हैं। इस बार भी सुशील सिंह चंदौली की सैयदराजा विधानसभा से भाजपा से दावेदारी करेंगे।

पूर्वांचल के जिलों में ऐसे कई और बाहुबली भी हैं जो विधानसभा, पंचायत और ब्लाक के चुनाव में माहौल बनाते और बिगाड़ते हैं। इनमें वाराणसी-मिर्जापुर से पूर्व एमएलसी विनीत सिंह, आजमगढ़ के रमाकांत यादव और उमाकांत यादव, भदोही के डॉ. उदयभान सिंह, गोरखपुर से हरिशंकर तिवारी, गोरखपुर से ही राजन तिवारी जैसे ऐसे कई नाम हैं जो अपने जिले और आसपास के जनपदों में एक अलग रसूख रखते हैं।

इन बाहुबलियों से मतदाताओं का एक बड़ा तबका प्रभावित रहता है और उनके कहे अनुसार ही मतदान के लिए अपना मन बनाता है। ऐसे में लगभग 2 महीने बाद जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे तो यह देखने लायक बात होगी कि बाहुबली कितने पानी में हैं।

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