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विकास दूबे एनकाउंटर : 1 साल, जिसके बाद से बिगड़ा प्रदेश में ब्राह्मण वोट का गणित

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विकास दूबे एनकाउंटर : एक साल, जिसके बाद से बिगड़ा प्रदेश में ब्राह्मण वोट का गणित

कुख्यात अपराधी विकास दूबे एनकाउंटर के बाद से ही यूपी का जातीय समीकरण बिगड़ गया था.  विकास दुबे ब्राह्मण होने के साथ साथ  खुद को ब्राह्मणों का मसीहा बताता था, लोगों ने उसे पंडित विकास दुबे के नाम से पुकारना शुरु कर दिया था. बिकरू कांड के बाद विकास दुबे समेत उसके 6 साथियों को पुलिस ने एनकाउंटर में ढ़ेर कर दिया था. इस घटना के बाद विपक्षी पार्टियों ने योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी सरकार होने के आरोप लगाए थे. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 नजदीक आ गए हैं. यह माना जा रहा है कि यूपी में ब्राह्मण वोटर और नेता प्रदेश सरकार से अभी भी नाराज हैं.

उत्तर प्रदेश में 16 फीसदी ब्राह्मण हैं जो किसी भी राजनीतिक पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने का दम रखते हैं. बीएसपी सुप्रीमों ने मायावती को 2007 में ब्राह्मणों ने सत्ता तक पहुंचाने मे मदद की थी . यूपी विधानसभा चुनाव के लिए बहुत ही कम समय बचा है. एसपी, बीएसपी और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां इस बात को जानती हैं कि ब्राह्मण वोट बैंक एक बड़ा हिस्सा प्रदेश सरकार से नाराज है.इसका फायदा उठाते हुए सभी राजनीतिक दल ब्राह्मण वोटरों को साधने में जुटे हैं. 

विकास समेत 6 का हुआ था एनकाउंटर

विकास दुबे बीते कई दशकों से खुद को ब्राह्मणों मसीहा बताता था, ब्राह्मण वोट बैंक की राजनीति करता था. गैंगस्टर की पैठ सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से थी, बिकरू कांड के बाद से ब्राह्मण वोटर और नेता खासे नाराज हैं. बिकरू हत्याकांड के बाद विकास दुबे समेत, अमर दुबे, अतुल दुबे, प्रेम प्रकाश पांडेय, प्रभात मिश्रा, बउआ दुबे को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था.  कानपुर के ग्रामीण क्षेत्र में चाहे विधानसभा, लोकसभा या फिर पंचायत चुनाव हो, प्रत्याशी विकास दुबे की कोठी में दस्तक जरूर देते थे. ब्राह्मण वोटरों के साथ ही अन्य जातियों के दर्जनों गांव के वोट वहीं पड़ते थे, जहां विकास दुबे कहता था.

ब्राह्मण महासभा योगी सरकार से नाराज

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा प्रदेश सरकार से बेहद नाराज है. विकास दुबे के खास राजदार अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे को भी बिकरू कांड में आरोपी बनाया गया था, खुशी तीन दिन पहले ही विदा होकर गांव आई थी. ब्राह्मण सभा का कहना था कि जिस लड़की की तीन दिन पहले शादी हुई हो, वो इतनी बड़ी घटना की साजिश में कैसे शामिल हो सकती है.  खुशी दुबे की कानूनी लड़ाई का खर्च ब्राह्मण सभा उठा रही है.

बीजेपी रूठों को मनाने में जुटी

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेई पार्टी से नाराज चल रहे हैं. लक्ष्मीकांत वाजपेई जब प्रदेश अध्यक्ष थे, तो बीजेपी ने यूपी में 72 लोकसभा सीटें जीती थीं. केंद्र और प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उनकी अनदेखी की जाने लगी.  जिसकी वहज से लक्ष्मीकांत वाजपेई समेत ब्राह्मण वर्ग बीजेपी से नाराज है.  लक्ष्मीकांत वाजपेई प्रदेश में ब्राह्मणों के नेता माने जाते हैं, फिलहाल बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहने उन्हे मनाने में जुटी है. 

क्यों शामिल हुए जितिन प्रसाद

बीजेपी इस बात को जानती है कि यूपी में ब्राह्मण वोटरों की सरकार से नाराजगी है. ब्राह्मण वोटरों को मनाने के लिए बड़े ब्राह्मण चेहरे की जरूरत है. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए जितिन प्रसाद ब्राह्मण है। यूपी में जितिन प्रसाद की गिनती बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती है. जितिन प्रसाद बीजेपी के लिए विधानसभा चुनाव में कितना फायदा पहुंचाते हैं, ये आने वाला वक्त बनाएगा.