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जलालाबाद में महिलाओं ने की वट सावित्री की पूजा

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जलालाबाद में महिलाओं ने की वट सावित्री की पूजा
कन्नौज - जलालाबाद में महिलाओं ने की वट सावित्री की पूजा हिन्दू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। इसे वट अमावस्या भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति की कामना के लिए व्रत करती हैं। वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। उसके चारों ओर महिलाएं फेरी लगाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पति को लंबी आयु मिलती है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था।
 इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की 7,11,21,51 या 101 आदि अपनी श्रद्धानुसार परिक्रमा लगाती हैं। बरगद के पेड़ में सात बार कच्चा सूत लपेटा जाता है।