सेमीकंडक्टर सेक्टर में एक लाख रोजगार होंगे पैदा

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शुक्रवार को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तीन प्रमुख घोषणाओं से भारत में 80,000 से एक लाख तक नौकरियां पैदा होंगी। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, मंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश से कई हजार नौकरियां पैदा करने में भी मदद मिलेगी। चंद्रशेखर ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग ने अकेले पिछले दो वर्षों में 10-12 लाख नौकरियां पैदा कीं। भारत में मेमोरी चिप्स बनाने के लिए माइक्रोन जैसी नवीनतम घोषणाएं हमारे लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कम से कम 80,000 से 1 लाख तक नई नौकरियां होंगी।

वाशिंगटन डीसी में माइक्रोन के भारतीय-अमेरिकी अध्यक्ष और सीईओ संजय मेहरोत्रा से मोदी की मुलाकात के एक दिन बाद गुरुवार को गुजरात में 2.75 अरब डॉलर की नई सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा स्थापित करने की घोषणा की। परियोजना के दो चरणों में पूरा किया जाएगा। इसमें माइक्रोन का निवेश 825 मिलियन तक होगा, और अगले कई वर्षों में 5,000 नई प्रत्यक्ष माइक्रोन नौकरियां और 15,000 सामुदायिक नौकरियां पैदा होंगी।

वहीं अमेरिका स्थित सेमीकंडक्टर कंपनी एप्लाइड मटेरियल्स ने भी चार वर्षों में 400 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ भारत में एक सहयोगी इंजीनियरिंग केंद्र बनाने की योजना की घोषणा की। सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए वेफर-फैब्रिकेशन उपकरण और संबंधित सेवाओं के अमेरिकी आपूर्तिकर्ता लैम रिसर्च ने भारत में 60,000 उच्च-तकनीकी इंजीनियरों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा की है।

चंद्रशेखर ने कहा, यह सिर्फ एक शुरूआत है क्योंकि अभी और भी बहुत कुछ आना बाकी है। साथ ही कहा, भारत तेजी से वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य और आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय भागीदार के रूप में विकसित हो रहा है। पिछले 18 महीनों में, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सेमीकंडक्टर विजन की घोषणा और भारत के सेमीकॉन पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए 76,000 करोड़ रुपये के नियोजित निवेश के बाद, बहुत प्रगति हुई है। मंत्री ने कहा प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के क्षेत्र में की गई घोषणाएं स्पष्ट रूप से संकेत देती हैं कि भारत के ‘टेकेड’ में युवाओं के लिए अमेरिकी स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के साथ काम करने के बहुत सारे अवसर होंगे।

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