क्यों बोया जा रहा है नफरत का बीज, क्यों हो रही है हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति

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देश– देश मे हिन्दू मुस्लिम विवाद बढ़ता जा रहा है। स्थिति दिनप्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। अब मुस्लिम हिन्दू को अपना दुश्मन समझने लगा है और हिन्दू मुस्लिम को। देश से भाईचारा मानो खत्म हो रहा हो। वहीं इस विवाद की आंच पर राजनेता अपने स्वार्थ की रोटियां सेक रहे हैं। कोई हिन्दू के नाम पर लोगों के मन मे नफरत के बीच रोपित कर रहा है। तो कोई जाति के नाम पर। 

आज स्थिति यह है कि राजनेता अपने स्वार्थ के लिए देश के मूल सिद्धांतों की भेंट चढ़ा रहे हैं। उनके उकसाऊ भाषण देश के लोगों के मन मे विभाजन उत्पन्न कर रहे हैं। अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए देश के युवाओं को अपराध की आग में झोंका जा रहा है। वहीं यदि कोई सवाल कर ले कि आखिर हिन्दू-मुस्लिम क्यों तो उस व्यक्ति को भरी सभा में एक विशेष समाज का हितैषी बताकर विवाद उत्पन्न किया जाएगा।
यदि हम बीते कुछ वर्षों के केस सुने तो उसने मुद्दों को हवा भी हिन्दू मुस्लिम के नाम पर दी जाती है। यदि किसी के साथ जघन्य अपराध हुआ और आरोपी मुस्लिम है तो मुद्दे को तूल दी जाती है। वहीं यदि आरोपी किसी अन्य समुदाय का है तो घटना को दिखाकर बात रफा दफा हो जाती है। 
हिन्दू-मुस्लिम की आड़ में राजनेताओं ने अपने आप को आज प्रबल किया है। कोई हिन्दू हितैषी बनकर समाज मे मुस्लिम के खिलाफ जहर उगलता है। तो कोई मुस्लिम हितैसी बनकर हिन्दू के खिलाफ हिंसा का पाठ पढ़ाता है। लेकिन कोई भी मानवता की बात करते हुए संतुलन बनाकर राजनीति नहीं करना चाहता।
आज समाज को राजनेताओं की चालबाजियों से बचकर रहना होगा। उन्हें इतना सजग बनना होगा कि कोई उनके मस्तिष्क को हिंसा की ओर न ले जा सके। क्योंकि यदि आप अपने ही देश में हिन्दू मस्लिम विवाद में घिरे रहे। तो वह दिन दूर नहीं होगा जब देश मे ग्रह युद्ध छिड़ जाएगा और भारत का विकास स्थिर हो जाएगा। 
क्योंकि इस बात से सभी परिचित हैं कि एक पैर के व्यक्ति में कितना भी स्मार्थ्य क्यों न हो उसे कहा अपाहिज ही जाता है। उसी प्रकार जब तक देश मानवता की राह पर चलकर हिन्दू मुस्लिम से ऊपर उठकर इंसानियत को नहीं समझेगा और किसी के साथ उसके धर्म या जाति के आधार पर व्यवहार नहीं करेगा। तब तक देश का विकास संभव नहीं है और भारत के विकास को रोकने में सबसे अहम भूमिका होगी देश मे उत्पन्न हिन्दू मस्लिम विवाद की।

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