22 के बजट के वो वादे जो रह गए अधूरे

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देश– साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाला है। केंद्र की मोदी सरकार आगामी 1 फरवरी को अपने कार्यकाल का अंतिम बजट प्रस्तुत करने जा रही है। पुनः बड़े बड़े वादों के साथ बजट प्रस्तुत किया जाएगा। 
सूत्रों का कहना है कि इसबार का बजट पुर्णतः आम आदमी को राहत देने वाला होगा। वहीं कई ऐसी घोषणा होंगी जो देश के विकास की सूत्रधार बनेंगी।
लेकिन इन बातों के सामने आते ही साल 2022 के बजट की घोषणा याद आ गई। तो आइये जानते हैं 2022 के बजट के वो वादे जो पूरे न हो सके।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2022 में बजट प्रस्तुत करते हुए देश की अर्थव्यवस्था में परिपेक्ष्य में बड़ी घोषणा करते हुए कहा था कि आगामी समय मे विकास दर 9.2 फ़ीसदी हो जाएगी। हम देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेंगे। लेकिन वैश्विक स्तर पर आई मंदी और रूस युक्रेन युद्ध ने मामला पलट दिया और यह सम्भव नहीं हो पाया।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने पिछले दिसम्बर में देश की विकास दर के अनुमान को संशोधित कर 6.8 फ़ीसदी कर दिया। लेकिन वर्ड बैंक ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और आगमी समय मे यह अन्य देशों की तुलना में सबसे तेज विकास करेगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना-

साल 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की गई। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है। बजट में इस योजना के तहत 80 लाख घर बनाने के वादे के साथ इस मद में 480 अरब रुपये आवंटित किये गए थे। कहा गया था कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 2022-23 के मध्य जो लोग लाभार्थी होंगे उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
योजना की निगरानी करने वाले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल 2022 से 23 जनवरी 2023 के मौजूदा वित्त वर्ष में शहरी इलाकों में 12 लाख घर बनकर तैयार हुए हैं जबकि ग्रामीण इलाक़ों में 26 लाख घर बने। यह आंकड़ा स्पष्ट बता रहा है कि योजना आपने लक्ष्य से 42 साल पीछे है।

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