जानें कितने दमदार थे शरद यादव

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बिहार– बीते दिन बिहार के दिग्गज नेता और जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष रहे शरद यादव जी का निधन हो गया। उनकी बेटी ने सोशल मीडिया के द्वारा उनकी मौत की पुष्टि की। शरद यादव की मौत से बिहार में मातम छा गया। कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
वहीं अगर हम शरद यादव के बारे में बात करें। तो वह एक सामाजिक नेता थे। उन्होंने अपने समाजवेवी स्वभाव से बिहार की जनता के दिल में जगह बना रखी थी। वहीं उन्हें बिहार की राजनीति के सरदार के रूप में जाना जाता था।
बीते साल से वह राजनीति से काफी दूर थे। उनका स्वास्थ्य बिगड़ा हुआ था। लेकिन अब जब वह सही हो रहे थे। तो राजनीतिक गलियारों से यह हवा आ रही थी। कि साल 2024 के चुनाव में वह अहम भूमिका निभाएंगे और विपक्ष एकजुटता में बिहार की ढाल बनेंगे। क्योंकि उन्हें बिहार की जनता का मूड बदलने वाला बड़ा खिलाड़ी कहा जाता है।

जाने कितने दमदार नेता थे शरद यादव-

आज की युवा पीढ़ी शरद यादव को उतना नहीं जानती। क्योंकि आज राजनीति के बाहुबली के रूप में मोदी विख्यात हैं। लेकिन यदि हम शरद यादव की बात करें तो वह गैर कांग्रेसी सबसे मजबूत नेता थे। उन्हें जनता का खूब स्नेह मिलता था। लोग उन्हें जनहितकारी राजनेता कहते थे। 
वहीं लालू प्रसाद यादव को उन्होंने अपना बड़ा भाई बताया। राजनीति में लालू प्रसाद यादव की धाक स्थापित करने में उनका अहम योगदान रहा है। साल 1974 में शरद यादव ने राजनीति में एंट्री मारी और बिहार के रंग में रंग गए। वहीं 1977 में शरद यादव ने अपना जलवा दिखाया और राजनीति में उभर कर सामने आए।
1976 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल के समय लोकसभा का कार्यकाल पांच साल के बदले छह साल कर दिया था. इसके विरोध में दो ही सांसदों ने इस्तीफ़ा दिया था, एक थे मधु लिमये और दूसरे थे शरद यादव। 
शरद यादव 1991 और 1996 का चुनाव जीत चुके थे. 1998 में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें हराकर, ख़ुद को यादवों के नेता के तौर पर स्थापित किया। शरद यादव अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री, श्रम मंत्री और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रहे और जॉर्ज फ़र्नांडीस के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संयोजक भी रहे। 
वहीं जब साल 2013 में भाजपा की बागडोर मोदी के हाथ मे आई तो उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ दिया और 2003 से 2016 तक शरद यादव जनता दल (यूनाइटेंड) के अध्यक्ष रहे। इसके बाद 2018 में शरद यादव ने लोकतांत्रिक जनता दल बनायी जिसका विलय उन्होंने 2022 में राष्ट्रीय जनता दल में कर दी।

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