जाने सुख के लिए क्या है संघर्ष की भूमिका

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आध्यत्मिक– व्यक्ति का जीवन संघर्ष से ही बेहतर बनता है। कहते हैं जो व्यक्ति अपने जीवन मे संघर्ष करता है उसी को सुख और सफलता हासिल होती है। वही जो व्यक्ति संघर्ष से दूर भागता है और अपने भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। उसे जीवन मे न तो सुख मिलता है और न ही सफलता।
वही सफलता को लेकर आचार्य चाणक्य कहते हैं- अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन मे ऊपर उठाना चाहता है और सफल होगा चाहता है। तो उसे अपने जीवन मे कठिन संघर्ष करना चाहिए और संघर्ष से नहीं भागना चाहिए। 
जो व्यक्ति संघर्ष से भागता है वह अपने जीवन में निश्चित तौर पर हार जाता है। वही जो व्यक्ति खुशी मन के साथ संघर्ष करता है और कई बार हारने के बाद भी जीतने का साहस रखता है। उसे जीत हासिल होती है ओर वही व्यक्ति अपने जीवन ने निखरता है और बेहतर बनकर उभरता है।

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