कल होगा आफताब पूनावाला का नार्को टेस्ट

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डेस्क। श्रद्धा वाकर (Shraddha Walkar) हत्याकांड में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला (AAftab Amin Poonawala) का सोमवार को नार्को टेस्ट करवा सकती है। बता दें साकेत कोर्ट ने पांच दिन के भीतर आफताब का नार्को टेस्ट (Narco Test) कराने का आदेश भी दिया है वहीं मंगलवार को आफताब की रिमांड खत्म हो रही है आफताब भी इसके लिए अपनी हामी भर चुका है।
 हालांकि नार्को टेस्ट से पहले कई तरह की मेडिकल जांच होती हैं जो पुलिस को जल्द से जल्द करानी पड़ेगी। वहीं पुलिस पहले ही नार्को टेस्ट पॉलीग्राफ टेस्ट (Polygraph Test) कराने की इच्छुक भी थी और श्रद्धा हत्याकांड ने देश को अब झकझोर कर रख दिया है। वहीं सामाजिक संगठनों से लेकर आम लोग मामले में आफताब को कड़ी से कड़ी सजा के पक्षधर हैं तो फिल्मी दुनिया की भी नामी-गिरामी शख्सियतें आफताब को दुर्लभतम सजा की मांग रख चुकी हैं। नार्को टेस्ट का इस्तेमाल अमूमन बेहद हाई प्रोफाइल या उलझे हुए आपराधिक मामलों में भी किया जाता है।
ट्रुथ सीरम के नाम से लोकप्रिय सोडियम पेंटोथल का इस्तेमाल नार्कोटिक्स एनालिसिस टेस्ट में किया जाता रहा है। इस दवा के इस्तेमाल से किसी शख्स की चेतना कम भी हो जाती है और वह खुलकर बोलने लग जाता है। इसके आलावा वह सम्मोहन की स्थिति में भी पहुंच जाता है तब यह टेस्ट किया जाता है। वहीं इसके तहत परीक्षण कर रहे लोग उस शख्स से सवाल कर सही उत्तर पाते हैं और नार्को टेस्ट करते वक्त एक मनोविज्ञानी, जांच अधिकारी फोरेंसिक विशेषज्ञ ही संबंधित शख्स के साथ मौजूद भी रह सकता है। इस अपराध को कबूलवाने के लिए थर्ड डिग्री के इस्तेमाल से नार्को टेस्ट को बेहतर माना जाता है और साकेत अदालत ने भी पुलिस को आफताब पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा है।
पॉलीग्राफ टेस्ट या लाइ डिटेक्टर टेस्ट एक ऐसे उपकरण की मदद से किया जा सकता है, जिसे हम झूठ पकड़ने की मशीन भी कहते हैं। वहीं यह मशीन सवाल-जवाब पूछे जाने के दौरान ब्लड प्रेशर, नाड़ी की रफ्तार सांस लेने की प्रक्रिया को भी रिकॉर्ड करती है। अब प्राप्त डाटा के विश्लेषण से पता किया जाता है कि संबंधित शख्स झूठ तो नहीं बोल रहा या सच।
बता दें लाइ डिटेक्टर टेस्ट का इस्तेमाल पुलिस पूछताछ जांच प्रक्रिया के तहत 1924 से कर रही है। हालांकि अदालती प्रक्रिया में इसे मान्य नहीं माना जाता और फिर भी पुलिस जांच में इससे एक दशा-दिशा तय करने में सक्षम भी हो जाती है।
आपको बता दें नार्को टेस्ट में व्यक्ति का परीक्षण तभी किया जाता है जब वह मेडिकल तौर पर पूरी तरह से फिट हो वहीं इसके तहत हिप्नोटिक सोडियम पेंटोथल और थियोपेंटोन भी कहते हैं जिसको इंजेक्शन के जरिये दिया जाता है। और साथ ही इसकी खुराक रोगी की आयु, लिंग अन्य मेडिकल स्थितियों पर निर्भर करती है और इसकी खुराक सटीक होनी चाहिए क्योंकि निर्धारित तय मात्रा में अंतर से शख्स की मौत होने की संभावना हो सकती है। 

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