AIIMS के इस महत्वपूर्ण व्यक्ति के VRS लेने पर क्यों हो रही राजनीतिक चर्चा

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डेस्क। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
एम्स के निदेशक के रूप में उनका साढ़े पांच साल का कार्यकाल 23 सितंबर को समाप्त हो गया था वहीं इसके बाद उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन भी किया था। अब उनके इस आवेदन को मंजूर कर लिया गया है बता दें गुलेरिया अप्रैल 2024 में रिटायर होने वाले थे।
कोरोना संकट के दौरान डॉ गुलेरिया की बातों को पूरा देश बहुत ही ध्यान से सुनता था। वह सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया का नेतृत्व करने वाले प्रमुख व्यक्ति रहे थे और उन्होंने महामारी से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई थी। गुलेरिया एम्स में 1992 में चिकित्सा विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए थे और उन्होंने 2011 में पल्मनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप चिकित्सा विभाग का गठन भी किया था।
एम्स में इतने सालों तक की सेवा
28 मार्च, 2017 को पांच साल के कार्यकाल के लिए एम्स के निदेशक के रूप में कार्यभार संभालने से पहले उन्होंने विभाग का नेतृत्व भी किया। उनका कार्यकाल 24 मार्च को समाप्त होना था, पर इसे तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया था. इसके पूरा होने पर उन्हें तीन और माह के लिए सेवा विस्तार प्रदान किया गया था। गुलेरिया ने एम्स में करीब 30 सालों तक अपनी सेवा दी है। उनका करियर बहुत शानदार भी रहा है।
2017 में बने थे एम्स के निदेशक
गुलेरिया को 2017 में एम्स का निदेशक नियुक्त किया गया था और गुलेरिया को एम्स में देश का पहला पल्मोनरी मेडिसीन और स्लीप डिसऑर्डर सेंटर स्थापित करने का श्रेय भी दिया जाता है। इसकी शुरुआत 2011 में की गई थी वहीं बता दें 5 अप्रैल 1959 को पैदा हुए डॉ गुलेरिया अभी 63 साल के ही हैं। 

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