सुप्रीम कोर्ट: चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना का कार्यकाल आज यानी 26 अगस्त को समाप्त होगा। एनवी रमन्ना ने यूयू ललित को अगला चीफ जस्टिस बनाने की शिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है। वही अगर हम बात एनवी रमन्ना की करे तो जब चीफ जस्टिस बने तो उस समय स्थिति सही नही थी। इससे पूर्व जो दो चीफ जस्टिस रहे वह काफी विवादों में घिरे रहे।
पूर्व मुख्य न्यायाधीशों रंजन गोगोई और शरद अरविंद बोबडे दोनो की न्यायिक नीतियो पर सवाल उठे। इनकी आलोचनाएं भी हुई। वही अब इन दोनों के कार्यकाल से एनवी रमन्ना के कार्यकाल की तुलना की जा रही है और इनके कार्यकाल को बेहतर बताया जा रहा है। इनके कार्यकाल को बेहतर बताने का एक कारण इनका किसी विवाद में नाम न आना भी है।
रंजन गोगोई के विवाद में घिरने का कारण उनके खिलाफ दायर याचिका की खुद ही सुनवाई करना था। उन्होंने खुद पर दायर याचिका की न सिर्फ सुनवाई की बल्कि खुद को निर्दोष बताते हुए मुक्त कर दिया। वही बोबड़े भी काफी विवादों से घिरे रहे। लेकिन एनवी रमन्ना को लोग उनके द्वारा की गई टिप्पणीयो के लिये जानते हैं। उन्होंने कोर्ट के केस में चाहे बड़े बड़े फैसले न लिये हो लेकिन मुद्दों पर अपना पक्ष अवश्य रखा है। जो काफी सुखियों में रहा।
उनके भाषण हमेशा जमीन से जुड़े रहे। उन्होंने आंध्रप्रदेश के एक स्कूल में भाषण देते हुए। प्राइवेट स्कूलों पर टिप्पणी की और कहा, यह स्कूल अब शिक्षा के नाम पर अपना व्यापार चला रहे हैं। यह अपना सामाजिक औचित्य खोते जा रहे है। अब यह कुकुरमुत्ते की तरह पनपने वाली फैक्ट्री बन चुके हैं जो तेजी से पनपने ही जा रहे हैं।
