दो किलोमीटर दूर से मच्छर सूंघ लेते हैं इन लोगों की गंध: रिपोर्ट

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डेस्क। आजतक मच्छर के डंक से कोई नहीं बच पाया है पर कुछ लोगों को मच्‍छर कुछ ज्‍यादा ही काटते हैं। असल में जिन लोगों को मच्‍छर ज्‍यादा काटते हैं उनकी गंध मच्‍छरों को काफी पसंद होती है। और ऐसा होना बहुत आम है होता है।
 सबसे पहले तो आप यह जान लें कि जो मच्‍छर काटते हैं असल में वो मादा मच्‍छर होती हैं। नर मच्‍छर कभी नहीं काटते। बहुत ज्‍यादा गर्मी या बहुत ठंड में मच्‍छरों का आतंक कम होता है लेकिन  मानसून में ये काफी सक्रिय होते हैं। इसी कारण से मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी फैलता है।
कुछ लोगों की त्वचा ऐसी होती है, जिससे मच्छर उनकी ओर काफी आकर्षित होने लग जाते हैं। असल में ये शरीर में मौजूद खास बैक्टेरिया से निकलने वाला यूरिक एसिड, लैक्टिक एसिड और अमोनिया के कारण होता है जिसकी महक मच्छरों को काफी पसंद होती है और यही कारण है कि इन्‍हें मच्‍छर ज्‍यादा काटते हैं।
O ब्‍लड ग्रुप को सबसे ज्यादा और A ग्रुप को सबसे कम काटते हैं मच्छर यह जैपनीज रिसर्च में पाया गया है कि जिन लोगों का ब्लड ओ (O) होता है, मच्छर उन्हें ही ज्यादा काटते हैं। वहीं इनका ब्‍लड मच्छर को अपनी ओर खींचता भी है। जबकि ए (A) ब्लड ग्रुप वालों को मच्छर कम काटते हैं और  जिन लोगों का ब्लड ग्रुप बी (B) होता है, उन्हें मच्छर सामान्य तौर पर काटते हैं न ही ज्यादा न बहुत कम।  
मच्छर की काटने की वजह उसके प्रजनन से जुड़ी होती है। इसके अलावा, मच्छरों को कॉर्बन डाई आक्साइड यानी Co2 की गंध भी बहुत पसंद होती है। इस गंध को करीब डेढ़ सौ फीट की दूरी से भी मादा मच्छर सूंघ सकने में सक्षम होती है।

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