100 साल की ऐसी परंपरा जिसने महामारी का किया खात्मा, पूजा के साथ पिलाई जाती है सिगरेट

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गुजरात: गुजरात के नवसारी में एक समय हैजा का तांडव मचा हुआ था। हजारों लोगों की हैजा से मौत हो रही थी। लोग काफी परेशान थे हर कोई इस बीमारी का रामबाण इलाज चाहता था। वही पारसी समाज के एक बड़े उद्योगपति ने समाज के लोगो को एक बड़ा पुतला पूजा करने के लिये दिया था। पारसी उद्योगपति ने दावा किया था कि इस पुतले की पूजा से हैजा का तांडव कम हो जाएगा। आज हैजा का प्रकोप तो खत्म हो गया है लेकिन पुतले की पूजा करने की परंपरा नहीं।

स्थानीय लोग इस पुतले की आज भी पूजा करते हैं आज के समय मे यह पुतला ढिंगला बापा के नाम से पूजा जाता है। लोग पहले इस पुतले को पूरा तैयार करते हैं फिर उसे सिगरेट पिलाते है। पहले लोग इसे बीड़ी पिलाया करते थे। लोगो की मान्यता है कि गुजरात मे ढिंगला बापा की पूजा करने से हैजा की बीमारी खत्म हुई थी और लाखों लोगो की जान बच गई थी।
गुजरात मे हर साल हर साल आषाढ़ मास की अमावस्या के दिन बड़ा पुतला बनाकर उसकी पूजा की परंपरा नवसारी के आदिवासी परिवार निभाते हैं. ढिंगला बापा में कई लोगों की आस्था बनी हुई लोग इन्हें कष्टनिवारक भी कहते हैं। आदिवासी समाज इसे बड़े उत्सव के रूप में मनाते हैं। आदिवासी समाज के लोग घास का पुतला बनाते है उसको मिट्टी के मुख के साथ तैयार करते हैं। लोग इस पुतले की पूजा करते हैं और मनोकामना मांगते हैं। लोगो की आस्था है कि इस पुतले की पूजा करने से उनके दुख खत्म हो जाते हैं।

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