इस राज्य में बढ़ी महिला मतदाताओं की संख्या भाजपा के लिए बन सकती है समस्या

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गुजरात मतदाता: सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि इस साल में नवम्बर अंत मे गुजरात विधानसभा चुनाव होने को है। सत्ताधारी दल भाजपा, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी व एआईएमआईएम गुजरात की जनता को अपने अपने खेमे में करने की कोशिश में लग गई है। गुजरात विधानसभा चुनाव इस बार कांग्रेस के परिदृश्य से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस इस बार गुजरात मे भाजपा के 30 साल के जीत के चक्रव्यूह को तोड़कर अपना 27 साल का वनवास खत्म करना चाह रही है। 

लेकिन साल 2022 का चुनाव खास सिर्फ इसलिए नही है कि गुजरात मे भाजपा और कांग्रेस के मध्य कांटे की टक्कर है। बल्कि इसलिए है क्योंकि यहां पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ गई है। वही अब सभी दलों का फोकस पुरुषों की अपेक्षा महिला मतदाताओं पर है लोग महिलाओं को लुभाने के लिए नए नए पैंतरे अपना रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार गुजरात मे अब महिला मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2.14 करोड़ हो गई है।
अगर हम साल 2017 की बात करे तो उस समय महिला मतदाताओं की संख्या कम थी लेकिन साल 2022 में होने वाले चुनाव में महिलाएं पुरुष से आगे निकल गई है। इस साल 3.45% महिला मतदाता बढ़े हैं, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 3.05% ही बढ़ी है। गुजरात मे कई सींटें ऐसी है जिनकी जीत हार का फैसला पुरुषों के वोट से नही बल्कि महिलाओं के वोट से होता है। इन सींटो पर महिलाएं जिसे चाहती है उसे जीत का स्वाद चखने को मिलता है।
वही इस बार गुजरात की राजनीति में कई परिवर्तन हुए हैं। आदिवासी समाज, मुस्लिम समाज और दलित समाज कही न कही भाजपा से रूठा हुआ है। वही अब महिला वोट बैंक की संख्या में हुए बढ़ोतरी भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी अगर भाजपा इसके लिए उम्दा रणनीति नही तैयार कर पाई तो इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा। क्योंकि कांग्रेस मुस्लिम, आदिवासी, दलित समाज को पहले से ही साधने की कोशिश में लगी है ओर महिला कार्ड खेलना कांग्रेस की राजनीति का पुराना पत्ता है।

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