इमरजेंसी से पहले इस फ़िल्म ने हिला दीं थी इंदिरा सरकार, संजय गांधी को जाना पड़ा था जेल

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डेस्क। बॉलीवुड में ऐसी कई फ़िल्में हैं, विवादों में ही फंसी रहीं। कई शानदार फिल्में तो रिलीज से पहले ही इतनी विवादित रहीं की रिलीज ही न हो सकीं। आज हम ऐसी ही एक फिल्म की बात करेंगे जो 70 के दशक में बनी और जिसने प्रधानमंत्री इंदिरा की सरकार को झंझोड़कर रख दिया। 

70 के दशक में बनी फ़िल्म जिससे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की सरकार हिल गई थी। इस फ़िल्म पर विवाद इतना बढ़ गया था कि इस फिल्म का अस्तित्व ही ख़त्म कर दिया गया था। इतना ही नहीं इस फ़िल्म के कारण इंदिरा गांधी के बड़े बेटे संजय गांधी (Sanjay Gandhi) को 2 साल के लिए जेल भी जाना पड़ा था।

इस फ़िल्म की खास बात यह है कि इस फिल्म का निर्माण एक कांग्रेस नेता ने करवाया था। हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ की, जो 1975 में देश में आपातकाल लगने से कुछ समय पहले बनाई गई थी।

बदला लेने के लिए इंदिरा सरकार ने पूरी तरह बर्बाद कर दी थी यह फिल्म….

किस्सा कुर्सी का’ फ़िल्म का निर्माण कांग्रेस से सांसद रहे अमृत नाहटा ने करवाया था वह एक राजनीतिक पैरोडी थी। फिल्म के कई पात्र रियल लाइफ किरदारों और वर्तमान राजनीति पर आधारित थे।

इमरजेंसी से ठीक पहले नाहटा ने अप्रैल 1975 में इस फिल्म को सेंसर बोर्ड के पास भेजा, इस फ़िल्म में शबाना आजमी, राज बब्बर और मनोहर सिंह लीड रोल में थे। नाहटा भी उस समय कांग्रेस से सांसद थे।

सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास भेज दिया जहां इस पर 51 आपत्तियां दर्ज कराई गईं और सरकार की ओर से फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल और इंदिरा गांधी के बड़े बेटे संजय गांधी को इस फ़िल्म पर सिर्फ बैन लगाकर तसल्ली नहीं हुई। दोनों ने फिल्म के सभी प्रिंट, यहां तक की मास्टर प्रूफ तक गुड़गांव, हरियाणा स्थित मारुति फैक्ट्री में लेजाकर जलवा दिए।

1977 में इमरजेंसी हटते ही अमृत नाहटा ने संजय गांधी और विद्याचरण शुक्ल के खिलाफ फिल्म के प्रिंट चुराने और उन्हें नष्ट करने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि संजय गांधी ने फिल्म में अपनी मां का चित्रण देखने के बाद यह ही अपराध किया था।

संजय गांधी और विद्याचरण शुक्ल को निचली अदालत के द्वारा मास्टर प्रिंट नष्ट करने का दोषी पाए जाते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई गई। 

इसके बाद 1980 में इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनीं। जिसके 10 दिन बाद ही संजय गांधी के खिलाफ जांच करने और उन्हें दोषी ठहराने वाले डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एन के सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। ऐसा भी बताया जाता है कि सिंह को गिरफ्तार करने के बाद पुलिसकर्मियों ने दिल्ली में जमकर प्रदर्शन किया था।

कुछ समय बाद अमृत नाहटा ने केस वापस ले लिया था। 1977 में उन्होंने ‘किस्सा कुर्सी का’ फ़िल्म का पुनः निर्माण किया। लेकिन इस बार फ़िल्म में कई बदलाव थे।

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