Politics:- अभी हाल ही संसद में कुछ शब्दों को असंसदीय घोषित किया गया। वही अब संसद भवन में हड़ताल, धरना प्रदर्शन किये जाने पर रोक लगा दी गई है। सचिवालय की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि अब सनद का उपयोग धरना प्रदर्शन या भूंख हड़ताल करने के लिए नहीं किया जा सकता है।
पीसी मोदी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदर्शन, धरना, हड़ताल, उपवास, या किसी तरह के धार्मिक समारोह को करने के लिए संसद भवन का उपयोग नही किया जा सकता है। जानकारो का कहना है कि यह सभी नियम इसलिए बनाये जा रहे हैं क्योंकि इस बार संसद सत्र काफी हंगामे से भरे रहने वाले हैं। विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, अग्निपथ योजना व सरकार की अन्य नीतियों के लिए सरकार को घेरने को तैयार है।
राज्यसभा महासचिव के आदेश के बाद विपक्ष हंगामा मचाए हुए हैं। राज्यसभा महासचिव के आदेश की कॉपी शेयर करते हुए कांग्रेस ने भाजपा पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया है कि विश्वगुरु का नया काम- D(h)arna मना है। जानकारी के लिए बता दें इससे पहले संसद में कुछ शब्दों को बैन किया गया था।
Vishguru’s latest salvo — D(h)arna Mana Hai! pic.twitter.com/4tofIxXg7l
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 15, 2022
जाने यूजर की प्रतिक्रिया:-
जयराम रमेश के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर कहता है कि मूर्ख कांग्रेसी अभी तक यह भी नहीं समझ पाये कि जब तक मुद्दों की बात नहीं करेंगे एक भी वोट नहीं जुड़ेगा और अगर मोदी जी को मौत का सौदागर, विषगुरु आदि कहकर अपमान करेंगे तो हिंदू और ज्यादा जागेगा और कांग्रेस के वोट कम होते जाएंगे। जलन को कंट्रोल करो और मध्यम वर्ग की बात करो। वही दूसरा यूजर कहता है कि संसद भवन लोगो के जुड़े मसले लोगो के हित के लिए बना है दंगा फसाद और आन्दोलन के लिए पूरे भारत की जमीन खाली है , जनसंख्या नियंत्रण कानून , समान नागरिक कानून , समान शिक्षा कानून , बनाकर सुरक्षित भारत का निर्माण कीजिए वैसे भी कांग्रेस का सम्पूर्ण सफाया ही भारत के प्रत्येक लोगो की इच्छा है।
वही एक अन्य यूजर कहता है कि वो विष निकालने में माहिर हैं लिहाजा आपके जैसे विषैले सांप उन्हें विषगुरु की संज्ञा दें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पूरे देशने देखा हैकि कांग्रेस जैसी विषधारीपार्टी ने देशमें अरबोंखरबों के घोटाले कर सोने की चिड़िया के पंख नोच डाले। तुष्टिकरण का जहर ऐसा बोया कि 2047 के सपने जी उठे।
