कलह बन रही काल , कैसे बिना मुख्यमंत्री लगेगी कांग्रेस की नैया पार

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राजनीति:- कांग्रेस की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जहाँ अभी कुछ महीने पहले पांच राज्यों में मिली हार के बाद कांग्रेस ने खुद के वजूद को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। वही अब गुजरात और हिमाचल का चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। क्योंकि इन दोनों राज्यों में भाजपा के हाँथो में सत्ता है वही गुजरात मे पिछले 30 सालों से भाजपा की विजय का शंख नाद हो रहा है। 

वही अब खबर यह सामने आ रही है कि इन दोनों विधानसभा सींटो को जीतने के लिए कांग्रेस यहां सामुहिक तौर पर चुनाव लड़ेगी और किसी बड़े नेता का चेहरा मुख्यमंत्री के तौर पर घोषित नहीं करेगी। यानी इस बार कांग्रेस बिना मुख्यमंत्री के चुनावी रण में ताल ठोकेंगी। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस का सीधा मुकाबला भाजपा से है। हालाकि गुजरात मे आम आदमी पार्टी लगातार इस कोशिश में लगी है कि वह कांग्रेस की पकड़ पर अपना वर्चस्व स्थापित कर सके। 
राजनीतिक विशेषज्ञयों का कहना है कि कांग्रेस ने सामुहिक चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी में मची अंदरूनी कलह के कारण लिया है। क्योंकि कांग्रेस के कई नेता भाजपा की ओर रुख कर चुके हैं और अगर अब कांग्रेस मुख्यमंत्री का नाम घोषित करती है तो हो सकता है इसके फायदे से ज्यादा कांग्रेस को नुकसान झेलने पड़ जाए। 
वही अगर हम बात गुजरात की राजनीति की करें तो गुजरात मे कांग्रेस पिछले 27 सालों से सत्ता में आने की कवायद में लगी हुई है। गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां हिंदुत्व की राजनीति होती हैं और प्रत्येक राजनीति दल जाति और धर्म के नाम पर जनता को लुभाने की कोशिश करता है। वर्ष 2017 में कांग्रेस ने गुजरात मे भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी और वह एक मजबूत दल के रुप मे उभर कर सामने आई थी।

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