कन्हैया लाल की मौत पर एक ही सवाल में आपस मे लड़ने लगे कांग्रेस नेता

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उदयपुर:- उदयपुर में कन्हैया लाल की हुई निर्मम हत्या से पूरा देश दहल गया है। हर कोई नया की गुहार लगाए हुए हैं। वही हिन्दू मुस्लिम नफरत की आग में झुलस रहा है। लेकिन राजनेता इस हत्या पर अपने राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंक रहे हैं ओर पक्ष विपक्ष आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर रहा है। 

जहां कांग्रेस के कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की वही किसी ने इस मामले को लेकर सरकार से कोई सवाल नहीं किया। लेकिन आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सरकार से ट्वीट कर इस मामले पर सवाल किया तो कांग्रेस नेता जयराम रमेश आग बबूला हो गए और उनपर भड़क उठे। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने ट्वीट कर कहा, धमकी मिलने के बावजूद भी कन्हैया को सुरक्षा उपलब्ध क्यों नहीं कराई गयी, क़ातिलों के साथ साथ पुलिस प्रशासन भी बराबर का दोषी है। SSP, DIG के खिलाफ अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं की गयी, क्या राजस्थान में सरकार का इकबाल बिलकुल खत्म हो गया है।
उनके इस ट्वीट पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा कि “दूसरी बार लक्ष्मण रेखा पार करने से पहले एक बार तो सोचना चाहिए था आदरणीय प्रमोद त्यागी जी। जो आपने लिखा है वो वैसे भी तथ्यों से बहुत परे है। रमेश के इस ट्वीट का आचार्य प्रमोद कृष्णम जवाब भी दिया है और कहा है कि बेरहमी और “बर्बरता” से “क़त्ल”किये गये कन्हैया के लिये आवाज़ उठाना राष्ट्र धर्म है प्रभु,और राष्ट्र धर्म का निर्वहन करने से किसी को रोकने की चेष्टा “राष्ट्र द्रोह” कहलाता है। 
 

 

वही यूजर्स जमकर इस घमासान में मसाला लगा रहे हैं। एक यूजर कहता है कि मुर्ख अगर सुरक्षा दी थी तो मर्डर कैसे हो गया उसकी जवाबदारी दो।। कुछ भी लिख देते हैं बिना सोचे समझे। अनपढ़। वही एक अन्य यूजर कहता है कि आपकी इस बात से पूर्ण रूप से सहमत हुआ जा सकता है आचार्य जी सरकार का इंकबाल ख़त्म हो चूका है माननीय मुख्यमंत्री जी जो स्वयं गृहमंत्री भी है ज़ब भी उनकी कुर्सी पर थोड़ी भी आंच आने क़ी आहट होती है तो तुरंत इस प्रकार क़ी घटनाये घटने लगती है पिछले छः महीने देखिये। ज़ब मुख्यमंत्री जी को बदलने क़ी चर्चा सुनाई देने लगती है तभी इस तरह के साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो जाते है जोधपुर, टोंक, भरतपुर, भीलवाड़ा अजमेर इत्यादि जगहों पर हुए सांप्रदायिक तनाव से एक दो दिन पहले कांग्रेस पार्टी मे सरकार नेतृत्व को बदलने का सोचते है राजस्थान मे इस प्रकार क़ी।

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