राजनीति:- भारत की राजनीति में 25- 26 जून 1975 एक काले दिन के रूप में जाना जाता है। क्योंकि इस समय भारत मे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी। अब इस आपातकाल को 47 साल पूरे हो गए हैं। वही आपातकाल को लेकर राजनेता अपनी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे हैं। भाजपा नेता आपातकाल को काला दिन बता रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आपातकाल को काला दिन बताते हुए उस समय की परिस्थितियों का जिक्र किया। सिंधिया के इस बयान पर दिग्विजय सिंह भड़क उठे।
दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्वीटर पर दो फोटो शेयर की और कहा हद है। चाटुकारिता की कोई हद नहीं होती है यह असीमित है। यह सत्ता का लालच क्या न करवाए। सिंधिया से यह उम्मीद नहीं थी लेकिन सत्ता के लिए सब जायज है। वही उन्होंने जो फोटो शेयर की है उसमें सिंधिया आपातकाल को भाजपा द्वारा काला दिन बताए जाने पर विरोध जाहिर कर रहे हैं। तस्वीर उस समय की है जब सिंधिया कांग्रेस परिवार का हिस्सा थे।
Sycophancy has no limits!!
Never expected from him.
Sad. @INCIndia @narendramodi https://t.co/zvHRffVW42— digvijaya singh (@digvijaya_28) June 26, 2022
तस्वीर को देखकर यह स्पष्ट हो रहा है कि राजनीति में राजनेता की अपनी कोई विचारधारा नहीं होती है। वह पार्टी और अपने स्वार्थ के लिए अपनी विचारधारा को परिवर्तित करता रहता है। जो अपने द्वारा किये समर्थन के विरोध में खड़े होना उसके लिए आम बात है। इसका सबसे बड़ा ताजा उदाहरण हार्दिक पटेल भी रहे। हार्दिक पटेल जिन्होंने अमित शाह को जनरल डायर की उपाधि दी और भाजपा की कड़ी आलोचना की। वो अब भाजपा में शामिल होने के बाद मोदी के गुणगान करने लगे। वही ज्योतिरादित्य सिंधिया का आपातकाल को काला दिन बताना उसकी पलटी मार राजनीति का हिस्सा है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कहा था कि 25 जून 1975, आज ही के दिन हमारे गौरवशाली लोकतंत्र की हत्या कर तत्कालीन सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी, जो भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन था। इसके विरोध में उठी हर आवाज को मेरा सादर नमन।
#Emergency1975HauntsIndia
https://twitter.com/JM_Scindia/status/1540603442422394880?t=u_2og-qZPgAg6MbG4wwuNg&s=19
देखे क्या कहते हैं यूजर्स:-
एक यूजर लिखता है कि मन के काले , कर्मो से काले लोगो की संगत में हो आप अभी इसलिए सब काला ही नजर आएगा आपको । ये अवसरवादिता भी कितना गिरा देती है इंसान को । वही एक अन्य यूजर कहता है की आपके पिताजी ने इमरजेंसी का समर्थन किया। 3 वर्ष पहले आप खुद आपातकाल में नही थे? अब अमृतकाल में आपातकाल पर ज्ञान बांट रहे हो महाराज ? वही एक अन्य यूजर कहता है कि शर्म बेंच के खा गए हैं क्या? जो आज तुम्हारा मसीहा, तुम्हारा बाॅस कर रहा है ओह तुम्हारे लिए शर्म से डूब म रने जैसा हैं और जिनको कोस रहे हैं उनके समर्थकों मे आपके अब्बा भी थे। पक्का थे न?
