ऐसे ही नहीं टूटा था भाजपा से दशकों पुराना रिश्ता, BJP के मिस्टर यू टर्न को विपक्ष ने बनाया राष्ट्रपति पद का दावेदार

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डेस्क। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा 18 जुलाई को होने वाले आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार होंगे। सिन्हा विपक्ष की ‘सर्वसम्मति’ पसंद के रूप में उभरे नेता है, पार्टियों ने मंगलवार को राष्ट्रपति पद पर चर्चा के लिए दूसरे दौर की बातचीत के बाद उनको दावेदार बनाया है।

बता दें कि देश के वित्त और विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके यशवंत सिन्हा विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के बहुत ही दिग्गज दावेदार माने जा रहे हैं। यशवंत सिन्हा को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त मंत्री रहते अपने कई नीतिगत फैसलों पर य टर्न लेने के लिए भी प्रसिद्ध प्राप्त है।

यशवंत सिन्हा को भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए भी जाना जाता है साथ ही उनके वित्त मंत्री रहते ही संसद में बजट पेश करने का समय शाम 5 बजे की जगह दिन में 11 बजे भी निर्धारित किया गया था। 

कभी भाजपा से था इतना गहरा रिश्ता

 (1.) 6 नवंबर 1937 को पटना में जन्मे सिन्हा 1960 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल हुए, और अपने सेवा कार्यकाल के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे।  उन्होंने 1984 में सेवा से इस्तीफा दे दिया था।

 (2.) इसके बाद सिन्हा ने 1984 में जनता पार्टी के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वह 1992 से 2018 तक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य रहे। 2021 में, वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए।

(3) अपने राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर, केंद्रीय वित्त मंत्री, विदेश मंत्री, और अन्य के रूप में कार्य किया।  उन्होंने आखिरी बार जुलाई 2002 से मई 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया।

 (4) सिन्हा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के तहत मौजूदा भाजपा सरकार के मुखर आलोचक भी रहे हैं।  कई मुद्दों पर मोदी सरकार और भाजपा के साथ उनकी असहमति के कारण पार्टी से उनका इस्तीफा हो गया, और बाद में, टीएमसी में उन्होंने प्रवेश किया।

 (5) सिन्हा, भाजपा के साथी आलोचकों – पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत के साथ उन्होंने ही शीर्ष अदालत में एक संयुक्त याचिका दायर कर राफेल मामले में मोदी सरकार से अपनी क्लीन चिट की समीक्षा की मांग की थी।  

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