डेस्क। अंतराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन की लड़ाई का दुष्प्रभाव आज तक देखने को मिलता है। इस कड़ी में पुराने बयानों को भी खंगाल कर देखा जाता रहा है। अब जर्मनी ने एक बार फिर भारत को आगाह किया है कि वह व्लादिमीर पुतिन को किसी तरह का कोई समर्थन न दें। उन्होंने अपने बयान में कहा कि रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन जैसे संप्रभु राष्ट्र पर हमला किया है इसी तरह का खतरा भारत जैसे देश पर भी भविष्य में आ सकता है।
बता दें भारत में साढ़े तीन वर्ष तक जर्मनी के राजदूत रहे वाल्टर लिंडनर ने अपनी आखरी प्रेस वार्ता के दौरान बिना चीन का नाम लिए इशारा करते हुए कहा कि पुतिन ने जैसा किया है उसका समर्थन करना भविष्य में उसके जैसे ही दूसरे शासकों को तैयार करना और उनको बढ़ावा देना है। जो आगमी समय में दूसरे देशों के लिए बड़ा खतरा पैदा करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत व रूस के रिश्तों का अपना इतिहास रहा है और वो यह बात समझते हैं। आगे उन्होंने कहा कि भारत व रूस के रिश्तों का असर भारत व यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय रिश्तों पर भी होगा। लिंडनर ने कहा कि पुतिन के आक्रामक रवैये का हर तरह से विरोध होना ही चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि रूस को इसका परिणाम भुगतना ही होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो भविष्य के लिए समस्या पैदा हो जाएगी। दुनिया में कई देश हैं जिनका पड़ोसी देशों के साथ में सीमा विवाद है या दूसरी तरह की समस्याएं हैं। स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लिए इस तरह का दूसरा देश कौन हो सकता है। अगर रूस को नहीं रोका गया तो भविष्य का हर आक्रांता यही कहेगा कि जब पुतिन कर सकते हैं तो दूसरे देश भी कर सकते हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत को रूस की और ज्यादा आलोचना करनी चाहिए? इस प्रश्न के जवाब में लिंडनर ने कहा कि हम भारत की स्थिति को समझते हैं क्योंकि हर देश का अपना इतिहास और रिश्ता होता है। हमें भारत से रूस की और कड़े शब्दों में आलोचना की उम्मीद रही थी। उन्होंने साफ किया कि, हम (जर्मनी) भारत पर कोई दबाव नहीं डालना चाहते लेकिन हम चाहते हैं कि भारत सिर्फ सिद्धांतो के आधार पर फैसला करे।
