डेस्क। भारत ने यूक्रेन और रूस के बीच जारी विवाद में मानवीय संकट पर रूस द्वारा लाए गए प्रस्ताव से दूर रहकर रूस-यूक्रेन स्थिति पर अपना मत स्पष्ट नहीं किया है।
साथ ही आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किय, क्योंकि इसे सिर्फ रूस और चीन का ही समर्थन मिल सका। भारत ने यूएनएससी के 12 अन्य सदस्यों के साथ उस प्रस्ताव पर खुद को अलग कर दिया। जिस कारण प्रस्ताव को स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
इस प्रस्ताव में रूस ने कहा, “मानवीय कर्मी, महिलाएं और बच्चों सहित यूक्रेन के नागरिक पूरी तरह से सुरक्षित हैं। लोगों की सुरक्षित और तेजी से निकासी को सक्षम बनाने के लिए बातचीत के लिए संघर्ष विराम का आह्वान किया गया है।”
किसी भी देश ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान नहीं किया क्योंकि इसमें आक्रमण का कोई भी संदर्भ नहीं था।
जानिए चीन ने क्या कहा?
रूस के इस प्रस्ताव का अकेले समर्थन करने के बाद चीन ने कहा कि सुरक्षा परिषद को यूक्रेन में मानवीय स्थिति में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। चीन की ओर से झांग जून ने बीजिंग की छह-सूत्रीय पहल की ओर इशारा किया और सुरक्षा परिषद के सदस्यों से कहा कि रूस के पक्ष में वोट देना यूक्रेन में मानवीय स्थिति को प्राथमिकता देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का आह्वान है।
