​​​​​​ कश्मीरी ब्राह्मणों पर हुए जुल्म की कहानी कश्मीरी पंडित की जुबानी

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पत्रकार:- उपेंद्र कुशवाहा

कुशीनगर। पाकिस्तान के कबाइली घुसपैठियों के जुल्म से तंग आकर वर्ष 1948 में पडरौना में बसा कश्मीरी ब्राह्मणों का परिवार अनुच्छेद 370 हटने के बाद खुशी से फूला नहीं समा रहा था। पिछले 70 वर्षों में देश में जितनी भी सरकारें आईं,उनके हर रहनुमा के दर पर अपनी व्यथा सुनाते हुए यह अनुच्छेद हटाए जाने की गुजारिश की, लेकिन किसी भी सरकार ने हिम्मत नहीं जुटाई। जिनके घर को कबाइली घुसपैठियों ने आग के हवाले कर दिया था। खुशनसीबी बस इतनी रही कि घर का कोई सदस्य इसमें हताहत नहीं हुआ,लेकिन उस घटना के बाद अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति छोड़कर यह कुनबा धीरे-धीरे पडरौना में ही घर-गृहस्थी बसा ली। 
दवा व्यवसायी सज्जन कुमार रैना उर्फ कुंवर रैना बताते हैं कि वे कश्मीरी ब्राह्मण हैं। लालचौक के निकट गनेश घाट पर उनका अपना मकान था। वर्ष 1948 में कश्मीर के हालात बड़े खराब थे। पाकिस्तान अपने कबाइली घुसपैठिए भेजकर आए दिन हमले कराता था। तब तक कश्मीर के तत्कालीन राजा गुलाब सिंह ने अपने राज्य का भारत में विलय नहीं किया था। जब कबाइलियों ने कश्मीर में पाकिस्तान की शह पर हमला किया तो वहां के राजा ने विलय के लिए भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से संधि की। पहली बार भारतीय फौज को कश्मीर की धरती पर उतारा गया था और सेना ने कबाइली घुसपैठियों को वापस पाकिस्तान में खदेड़ दिया था। हालांकि बाद में आतंकी घुसपैठ एवं हमले फिर भी जारी रहे।
सज्जन रैना बताते हैं कि कश्मीर के निरंतर बिगड़ते हालात को देखते हुए उनके पिता अमरनाथ रैना पडरौना आ गए। फिर एक साल के भीतर ही वह अपने माता-पिता व परिवार के अन्य लोगों को भी यहीं लेकर चले आए। तब से सज्जन रैना सहित उनके दो भाइयों की शादी भी यहीं हुई और अब पूरा परिवार पडरौना शहर में ही निवास करता है। 

कबाइलियों ने जला दिया था घर 

सज्जन रैना बताते हैं कि वर्ष 1948 में पाकिस्तान के कबाइली घुसपैठियों की दखल बहुत बढ़ गई थी। उनका जुल्म इतना अधिक था कि हर कोई आजिज आ गया था। कबाइलियों ने लालचौक के निकट गनेश घाट स्थित उनके घर को जला दिया था। उनका सेब का बगीचा था। लंबे अर्से से जो ख्वाहिश थी,अब वह पूरी हो गई है। वहां लौटने की उम्मीद जग गई है। 

अनुच्छेद-370 हटाने के लिए कई बार हुआ प्रयास 

सज्जन रैना बताते हैं कि अनुच्छेद-370 हटाने के लिए भारत सरकार से कई बार मांग की जा चुकी है। उन्होंने खुद कई बार सरकार को पत्र भेजा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2012 में शपथ ग्रहण के तत्काल बाद विस्थापित कश्मीरियों के लिए एक हजार शब्दों में आवेदन मांगा था। सज्जन रैना और उनके रिश्तेदारों ने भी पत्र भेजा, इसमें ज़बाब आने में कई वर्ष लग गए। इसके अब उसका जवाब मिला है। द कश्मीर फाइल मूवी बनाकर ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सज्जन रैना ने कहा कि पडरौना के के सिनेमा हॉल में लगे यह मूवी भले ही नहीं देखी है लेकिन परिवार के लोगों से मिली क्लिप को देखकर रोंगटे खड़े हो गए हैं। समय मिलते ही यह मूवी देखने जरूर जाऊंगा।

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