नए राज्य मंत्रिमंडल के चयन पर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और पीपीसीसी प्रमुख नवजोत सिद्धू के बीच मतभेद हैं

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पंजाब 

कांग्रेस का संकट अभी खत्म हो नजर नहीं आ रहा है. कांग्रेस हाईकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी तो कर दी, लेकिन अभी नए सीएम के मंत्रिमंडल को तय करने के लिए राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई थिंक टैंक हाथ-पांव मार रहे हैं. बीते शुक्रवार को भी राहुल गांधी के आवास पर मंत्रिमंडल को फाइनल करने के लिए रात 2 बजे से सुबह चार बजे तक बैठक चली और मंत्रिमंडल की उस सूची पर विचार किया गया जिसे हाईकमान ने बीते गुरुवार को तैयार कर लिया था।

सूत्रों के हवाले से कहा है कि नए राज्य मंत्रिमंडल के चयन पर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और पीपीसीसी प्रमुख नवजोत सिद्धू के बीच मतभेद हैं. जिसके चलते मंत्रिमंडल के विस्तार में देरी हो रही है. पिछले कुछ दिनों में सीएम का दिल्ली का यह तीसरा दौरा है. उन्हें बीते शुक्रवार सुबह ही उन्हें दिल्ली दोबारा बुलाया गया था. इसमें अहम बात यह है कि कि पार्टी आलाकमान ने तीन में से दो बैठकों के लिए सिद्धू को नहीं बुलाया था।

सूत्रों ने बताया कि सिद्धू और चन्नी कई विधायकों को कैबिनेट में शामिल करने पर एकमत नहीं थे. राजा वड़िंग, परगट सिंह और कुलजीत नागरा को शामिल करने पर दोनों के बीच मतभेद सामने आए हैं. जबकि सिद्धू तीनों का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं. चन्नी का मानना है कि संगठन के लोगों को पार्टी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि चुनाव नजदीक हैं. परगट सिंह पीपीसीसी महासचिव हैं और नागरा कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

साथ ही सिद्धू, राजा वड़िंग का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल उनका कड़ा विरोध कर रहे हैं. बादल ने चन्नी के सीएम बनने में भी अहम भूमिका निभाई थी. चन्नी को गुरुवार को दिल्ली बुलाया गया था और उन्होंने वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, प्रभारी महासचिव हरीश रावत, हरीश चौधरी और अजय माकन और अंत में राहुल गांधी के साथ दो दौर की बैठकें की थीं. राहुल गांधी की पूर्व पीपीसीसी प्रमुख सुनील जाखड़ से करीब 45 मिनट तक मुलाकात के बाद शुक्रवार को उन्हें फिर से बैठक के लिए बुलाया गया था।

इस हलचल से पहले पंजाब में कांग्रेस कैबिनेट मंत्रियों की सूची की प्रतीक्षा कर रही थी क्योंकि मुख्यमंत्री ने अपने सहयोगियों को बताया था कि सूची को अंतिम रूप दिया गया है, इसे अंतिम रूप के लिए एआईसीसी प्रमुख सोनिया गांधी के सामने रखा जाना था. जबकि पार्टी अमरिंदर के मंत्रिमंडल के अधिकांश मंत्रियों को बरकरार रखे हुए है, उसे केवल कुछ नए मंत्रियों को शामिल करना है. लेकिन कुछ पर ही अंतिम फैसला नहीं हो पा रहा है।

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