पूर्ति निरीक्षक ने उड़ाई डीएम के आदेशों की धज्जियां

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जनपद उन्नाव का पूर्ति कार्यालय तहसील क्षेत्र के उन राशन विक्रेताओं को पूर्ण संरक्षण दे रहा है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर आयुक्त खाद्य एवं पूर्ति विभाग के निर्देशों के विपरीत प्रॉक्सी के तहत ओटीपी सुविधा के अंतर्गत राशन का वितरण कर घालमेल किया।जिलाधिकारी ने 27 जनवरी को समीक्षा के दौरान नियमो के विपरीत कार्य करने वाले ऐसे विक्रेताओं की पकड़ कर जिला पूर्ति अधिकारी को नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश भी दिए। निर्देश के क्रम में जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी खाद्य अधिकारी/पूर्ति निरीक्षकों को 30 जनवरी को पत्र भेजकर कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए।

जनपद उन्नाव के सफीपुर तहसील के पूर्ति विभाग/पूर्ति निरीक्षक ने फर्जी तौर पर तहसील क्षेत्र के समस्त राशन विक्रेताओं को जिन्होंने नियम विरुद्ध कार्य किए उन्हें नोटिस देकर जवाब तलब करते हुए कार्यवाही का फरमान सुनाया। नोटिस मिलते ही राशन विक्रेताओं में हड़कंप मच गया जो पूर्ति विभाग के लिए सोने में सुहागा जैसा था। फिर साठ-गांठ का खेल अर्थात वसूली शुरू हो गई। सूत्रों की माने तो पूर्ति कार्यालय ने ऐसे सभी विक्रेताओं से जिन्होंने घपला किया उनसे मनचाही वसूली कर उन्हें संरक्षण दे दिया ।यही कारण है कि एक माह से अधिक समय बाद भी कार्यवाही शून्य है कार्यवाही की फाइल भी अलमारी में बन्द हो गई।

राशन विक्रेताओं को मात्र दस कार्ड धारकों को प्रॉक्सी के तहत राशन वितरण करना था ।जिसके लिए कार्ड धारकों के मोबाइल नम्बर लिये जाने थे ।जिसमें ओटीपी आई हो ओटीपी एवं मोबाइल नम्बर सुरक्षित रखना था ।लेकिन ऐसा हुआ नहीं दस से कई अधिक कार्ड धारकों को प्रॉक्सी के अंतर्गत वितरण किया जो जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक में पकड़ में आ गया था। तीन सौ कार्ड पर अप्रैल माह से अक्टूबर तक 79, जनवरी व फरवरी 329 कार्ड में 38 कुल प्रॉक्सी 127 सामान्य परिस्थितियों में नियमित प्रॉक्सी कर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए आपूर्ति विभाग की मेहरबानी पर बेखौफ मृतको की प्रॉक्सी समेत ग्रामीणों के राशन की कालाबाजारी जमकर की । लेकिन उच्चाधिकारी कुम्भकरणी नींद सोये हैं, जनता इस आस में है किब जिम्मेदार कब नींद से जागेगें? उनके साथ हो रही हेराफेरी से निजात मिलेगी। जिलाधिकारी, सीडीओ, डीएसओ रामेश्वर कुमार तक प्रॉक्सी मामले की जानकारी है फिर भी आपूर्ति विभाग में पैसों की सेटिंग गेटिंग के चलते उच्चाधिकारियों के आदेश बौने साबित हो रहे हैं। जिसकी जानकारी जनपद के उच्चाधिकारियों को भी है ।अब देखना होगा कि उच्चाधिकारियों से प्राप्त कार्यवाही के आदेशो के अनुपालन में आपूर्ति विभाग लहबरपुर कोटेदार पर कार्यवाही करता है या कोटेदार फर्जीवाड़े के तहत प्रॉक्सी से ग्रामीण के हक़ पर डांका डालकर कालाबाजारी जारी करता रहेगा।

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