प्रदेशबंदी रक्षकों की ‘तीसरी आंख रखेगी ‘उत्‍तराखंड में कैदियों पर नजर

बंदी रक्षकों की ‘तीसरी आंख रखेगी ‘उत्‍तराखंड में कैदियों पर नजर

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देहरादून। प्रदेश की चार अति संवेदनशील जेलों में जेल प्रशासन अब कैदियों/बंदियों की हर गतिविधि पर नजर रख पाएगा। इसके लिए इन जेलों में बंदी रक्षकों को ऐसी ड्रेस मुहैया कराई जाएगी, जो बॉडीकैम से लैस होगी। ये बॉडीकैम जेल अधीक्षक के कार्यालय में बने कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे। इससे जेल के जिस हिस्से में बंदी रक्षक तैनात होंगे या भ्रमण कर रहे होंगे, उस जगह पर जेल अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों की भी नजर रहेगी।

परिचितों से मुलाकात और पेशी से लौटने के बाद कैदियों/बंदियों की तलाशी का पूरा घटनाक्रम भी इस कैमरे में कैद होगा। ऐसे में कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल एक्शन लिया जा सकेगा। जेल में कैदियों/बंदियों द्वारा मोबाइल का इस्तेमाल और नशे की सप्लाई का खेल किसी से छिपा नहीं है। प्रदेश की जेलों में अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। इस पर लगाम के लिए ही पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) जेल एपी अंशुमान ने यह नई योजना बनाई है। इसके तहत पहले चरण में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी जेल में 50 बंदी रक्षकों को बॉडीकैम से लैस ड्रेस दी जाएगी। इसके लिए टेंडर दिए जा चुके हैं। सब योजना के मुताबिक रहा तो जनवरी में इन जेलों में बंदी रक्षक नए गणवेश में निगरानी करते नजर आएंगे। सबसे खतरनाक कैदी इन्हीं चार जेलों में बंद हैं। इन जेलों में मोबाइल के इस्तेमाल और नशे की आपूर्ति की शिकायतें अक्सर मिलती रहती हैं। आइजी जेल एपी अंशुमान का कहना है कि प्रदेश की कुछ जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन इन कैमरों से प्रत्येक कैदी और मुलाकातियों पर नजर रखना असंभव है। इसीलिए नई योजना बनाई गई है। इससे जेल प्रबंधन के पास यह रिकॉर्ड भी रहेगा कि कैदी से मिलने कौन-कौन आया।

सीसीटीवी कैमरे भी लगेंगे

प्रदेश में कुल 11 जेल हैं, जिनमें इस समय 52 हजार से ज्यादा कैदी/बंदी निरुद्ध हैं। इन जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए तीन करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसी बजट से बंदी रक्षकों को बॉडीकैम युक्त ड्रेस भी उपलब्ध कराई जानी है। आइजी जेल का कहना है कि अगले वर्ष मार्च तक सभी जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा हो जाएगा।

स्वस्थ रखने को कराया जाएगा योग 

जेल में रहने के दौरान समाज की मुख्यधारा से कट जाने के कारण अधिकांश कैदियों/बंदियों का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। इसलिए अब जेलों में कैदियों/बंदियों को योगाभ्यास कराया जाएगा। साथ ही जिनके स्वभाव में परिवर्तन नजर आएगा, उनकी काउंसिलिंग की जाएगी। आइजी जेल ने बताया कि इसके लिए कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क किया गया है। साथ ही कुछ गैर सामाजिक संस्थाओं से भी बात की गई है। यह सुविधा जेलों में दिंसबर से शुरू होगी।

 

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